इसके अलावा 10 शहरी स्थानीय निकायों को नक्शा तैयार करने वाली परियोजनाओं के लिए 143 रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। लेखपालों और राजस्व कर्मचारियों को भी इस तकनीक के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जा रही है।
सेंटीमीटर तक सटीक होगी पैमाइश
इस डिजिटल सर्वे में GNSS रोवर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह उपग्रहों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन के किसी स्थान की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। नेटवर्क से कनेक्ट होने पर इससे करीब 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता हासिल की जा सकती है।
जमीन विवादों में मिल सकती है राहत
डिजिटल पैमाइश से मानवीय गलती की संभावना कम होने की उम्मीद है। सर्वे के दौरान जुटाए गए आंकड़ों को GIS और भूमि रिकॉर्ड सिस्टम से जोड़ा जा सकेगा। इससे जमीन की स्थिति और सीमाओं से जुड़े रिकॉर्ड को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी।
हरदोई स्थित चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र में भी रोवर लगाए गए हैं, जबकि लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों में उपलब्ध कराए गए उपकरणों से कर्मचारियों को नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

0 comments:
Post a Comment