1. बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे
करीब 336 किलोमीटर लंबा छह लेन का यह एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे बक्सर से भागलपुर तक प्रस्तावित है। इसका रास्ता भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, जमुई और बांका जैसे जिलों से होकर गुजरने की योजना है। इससे दक्षिण बिहार के कई हिस्सों को तेज कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
2. आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे
करीब 190 किलोमीटर लंबा चार लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर गया के आमस से दरभंगा तक बनाया जा रहा है। यह एनएच-119डी का हिस्सा है और गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा क्षेत्र को जोड़ेगा। परियोजना पूरी होने पर इन इलाकों के बीच यात्रा आसान और तेज होने की उम्मीद है।
3. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे
यह परियोजना पटना क्षेत्र को उत्तर-पूर्वी बिहार से जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित मार्ग हाजीपुर क्षेत्र से आगे समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया क्षेत्र तक जाने की योजना है। रास्ते में इंटरचेंज, पुल, रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास जैसी सुविधाएं विकसित की जानी हैं।
4. रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे
करीब 585 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का बिहार में हिस्सा लगभग 408 किलोमीटर बताया गया है। यह नेपाल सीमा के पास स्थित रक्सौल को पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह से जोड़ेगा। इससे नेपाल और बिहार से आने वाले माल को बंदरगाह तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है और व्यापार तथा माल ढुलाई को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
5. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे
छह लेन के इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का बिहार में हिस्सा करीब 417 किलोमीटर बताया जा रहा है। इससे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे जिले बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ सकते हैं। आगे यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र से कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद कर सकता है।
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