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थायराइड के ये हैं 5 लक्षण, महिलाएं न करें इग्नोर!

हेल्थ डेस्क। आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में थायराइड एक आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है, खासकर महिलाओं में। थायराइड एक ऐसी स्थिति है जिसमें थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती या अत्यधिक हार्मोन का उत्पादन कर देती है। यदि इसे समय पर पहचानकर नियंत्रित न किया जाए तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।

5 मुख्य लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

1. अचानक वजन बढ़ना या घटना

यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ रहा है या घट रहा है, तो यह थायराइड का संकेत हो सकता है। हाइपोथायराइडिज़्म (हार्मोन कम होने पर) में वजन बढ़ता है, जबकि हाइपरथायराइडिज़्म (हार्मोन अधिक होने पर) में वजन घट सकता है।

2. थकान और ऊर्जा की कमी

अचानक थकान, काम करने की क्षमता में कमी या दिनभर सुस्ती महसूस होना भी थायराइड का संकेत हो सकता है। यह शरीर में ऊर्जा निर्माण प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

3. बालों का झड़ना और त्वचा में बदलाव

बाल पतले होना या तेजी से झड़ना, त्वचा का रूखापन या अधिक सूखापन, थायराइड की सामान्य चेतावनी लक्षणों में शामिल हैं।

4. हृदय गति में असामान्य बदलाव

यदि दिल की धड़कन तेज़ या अनियमित हो रही है, अक्सर ठंड लगना या हाथ-पैर ठंडे रहना, तो यह भी थायराइड से संबंधित हो सकता है।

5. मूड स्विंग और मानसिक बदलाव

अचानक डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या याददाश्त कमजोर होना भी थायराइड के लक्षण हो सकते हैं।

इस संदर्भ में डॉक्टरों की क्या है राय?

एंडोक्राइनोलॉजिस्ट कहते हैं कि महिलाओं को इन लक्षणों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। यदि किसी भी लक्षण की उपस्थिति महसूस हो, तो ब्लड टेस्ट के जरिए टीएसएच (TSH), टी3 और टी4 हार्मोन स्तर की जांच करानी चाहिए। शुरुआती पहचान और सही इलाज से थायराइड को नियंत्रित किया जा सकता है और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से बचा जा सकता है।

बिहार में खुशखबरी, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भर्ती जल्द

पटना। बिहार सरकार राज्य में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के शैक्षणिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में राज्य के 91 एससी-एसटी आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की व्यापक स्तर पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। कुल 4966 पदों पर नियुक्ति प्रस्तावित है, जिनमें 1326 पद शिक्षकों के हैं। इन सभी नियुक्तियों का संचालन बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से किया जाएगा, जिससे चयन प्रक्रिया पारदर्शी और योग्यता आधारित होगी।

शिक्षा के साथ रोजगार के अवसर

इन भर्तियों से न केवल विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। लंबे समय से खाली पड़े पदों के भरने से आवासीय विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशासनिक संचालन अधिक सुदृढ़ होगा।

हर प्रखंड में छात्रावास का लक्ष्य

सरकार का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में राज्य के सभी 534 प्रखंडों में एससी-एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास उपलब्ध कराना है। वर्तमान में बिहार में 139 छात्रावास संचालित हैं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 60 नए छात्रावासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। यह पहल विशेष रूप से दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा तक पहुंच आसान बनाएगी।

नए आवासीय विद्यालय और छात्रावास

राज्य में 28 नए आवासीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई है, जो शिक्षा के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेंगे। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में 100 बेड क्षमता वाले सावित्री बाई फुले छात्रावास खोलने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 18 जिलों में भूमि आवंटन की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।

छात्रवृत्ति योजनाओं में हुआ बड़ा इजाफा

सरकार ने आर्थिक सहायता को और प्रभावी बनाने के लिए छात्रवृत्ति योजनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को मिलने वाली राशि को दोगुना कर दिया गया है। वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में आईटीआई छात्रों के लिए 7500 रुपये, डिप्लोमा एवं पॉलिटेक्निक कोर्स के लिए 15 हजार रुपये और व्यावसायिक तकनीकी शिक्षा के लिए 25 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

आज शनि बदलेंगे खेल, इन 4 राशियों को धन और सफलता

राशिफल। शनि को कर्म और न्याय का ग्रह कहा जाता है। जब शनि अनुकूल होते हैं, तो वे व्यक्ति को अचानक नहीं बल्कि स्थायी और मजबूत सफलता प्रदान करते हैं। आज शनि की विशेष चाल चार राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। धन, करियर और मान-सम्मान के मामले में आज का दिन इन राशियों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है।

1. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए आज शनि का प्रभाव विशेष रूप से शुभ है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। निवेश से जुड़े फैसले लाभदायक साबित हो सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को आय के नए स्रोत मिल सकते हैं, जबकि व्यापारियों को पुराने ग्राहकों से बड़ा ऑर्डर मिलने के योग हैं। आज लिया गया कोई ठोस निर्णय भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है।

2. सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन करियर के लिहाज से अहम है। शनि की कृपा से कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत को पहचान मिलेगी। प्रमोशन, पद परिवर्तन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। जो लोग सरकारी क्षेत्र या प्रबंधन से जुड़े हैं, उन्हें विशेष लाभ हो सकता है। आत्मविश्वास बढ़ेगा और विरोधियों पर विजय मिलेगी।

3. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों को आज शनि अप्रत्याशित धन लाभ दे सकते हैं। पुराना निवेश, बीमा या संपत्ति से जुड़ा मामला आपके पक्ष में जा सकता है। व्यापार में साझेदारी से फायदा होगा और जोखिम लेने की क्षमता बढ़ेगी। हालांकि शनि अनुशासन चाहते हैं, इसलिए जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा।

4. मकर राशि

मकर राशि शनि की अपनी राशि मानी जाती है, इसलिए आज का दिन आपके लिए बेहद खास हो सकता है। करियर में स्थिरता आएगी और सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा। वरिष्ठ लोगों का सहयोग मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही समस्याएं खत्म होने लगेंगी। आर्थिक रूप से भी स्थिति मजबूत होगी और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा।

यूपी में 1 करोड़ से ज्यादा को 'घरौनी', ग्रामीणों को खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए अब तक एक करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को ‘घरौनी’ उपलब्ध कराई है। यह पहल ग्रामीण भारत में कानूनी सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और सामाजिक स्थिरता की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

ग्रामीणों को मिला कानूनी स्वामित्व का प्रमाण

स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में बसे परिवारों को उनके मकान और जमीन का वैध दस्तावेज प्रदान किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में हजारों गांवों में सर्वे पूरा कर डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने घर और संपत्ति पर स्पष्ट कानूनी अधिकार प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, बैंक से ऋण प्राप्त करने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभा रहा है।

घरौनी से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

घरौनी केवल एक कागज नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा की चाबी बनकर उभरी है। इसके माध्यम से अब गांवों के लोग औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ पा रहे हैं। छोटे कारोबार, स्वरोजगार और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए ऋण लेना आसान हुआ है। इससे न सिर्फ आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।

इस नई व्यवस्था से भूमि विवादों पर लगी लगाम

स्पष्ट और डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से गांवों में जमीन और मकान से जुड़े विवादों में तेजी से कमी देखी जा रही है। फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी नियंत्रण लगा है। इससे ग्रामीण स्तर पर आपसी तनाव घटा है और प्रशासनिक व्यवस्था अधिक मजबूत हुई है। आने वाले समय में न्यायालयों में लंबित मामलों में भी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश में लगातार जारी है वितरण का कार्य

प्रदेश सरकार घरौनी वितरण की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ा रही है। हाल के महीनों में लाखों नई घरौनियां तैयार की गई हैं और चरणबद्ध तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचाई जा रही हैं। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि कोई भी योग्य ग्रामीण परिवार संपत्ति अधिकार से वंचित न रह जाए।

ड्रोन तकनीक से सर्वे में आई है पारदर्शिता

स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इससे गांवों का सर्वे तेज, सटीक और पारदर्शी बन पाया है। आधुनिक तकनीक से तैयार डिजिटल नक्शे और रिकॉर्ड भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। यह पहल योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति को भी मजबूती देती है।

रूस का भारत को बड़ा ऑफर पैकेज, अमेरिका चौंका, चीन रह गया सन्न!

नई दिल्ली। भारत और रूस के रक्षा संबंध एक बार फिर वैश्विक रणनीतिक चर्चा के केंद्र में हैं। रूस ने भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान Su-57 को लेकर ऐसा प्रस्ताव दिया है, जिसने अमेरिका और चीन—दोनों को सतर्क कर दिया है। टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, सोर्स कोड तक पहुंच और भारत में घरेलू उत्पादन जैसे ऑफर किसी भी देश के लिए असाधारण माने जाते हैं। इसके बावजूद भारत ने अब तक इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Su-57 को लेकर भारत-रूस के बीच क्या चल रहा है

रूस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) के अनुसार, Su-57 को “मेक इन इंडिया” के तहत भारत में बनाने की संभावनाओं पर तकनीकी स्तर की बातचीत उन्नत चरण में है। रूस की ओर से संकेत दिए गए हैं कि मौजूदा Su-30MKI असेंबली फैसिलिटी का इस्तेमाल Su-57 के लाइसेंस उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सप्लाई चेन और निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने की पेशकश भी की गई है।

रूस क्यों कर रहा है इतना बड़ा ऑफर

रूस के लिए भारत सिर्फ एक खरीदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के बीच रूस अपने रक्षा निर्यात के लिए भरोसेमंद साझेदारों की तलाश में है। भारत को Su-57 का ऑफर देकर रूस न केवल एक बड़े बाजार को साधना चाहता है, बल्कि अपनी पांचवीं पीढ़ी की तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता भी दिलाना चाहता है। यही वजह है कि रूस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड जैसी शर्तों पर भी बातचीत के लिए तैयार दिख रहा है।

Su-57 क्या है और क्यों है खास

Su-57 रूस का पहला ऑपरेशनल पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है, जिसे मल्टीरोल क्षमताओं के साथ विकसित किया गया है। यह विमान एयर सुपीरियरिटी, डीप स्ट्राइक, दुश्मन के एयर डिफेंस को नष्ट करने और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी जबरदस्त मैन्यूवरेबिलिटी, लंबी दूरी के हथियारों की क्षमता और मानव-रहित प्लेटफॉर्म्स के साथ टीमिंग की योग्यता मानी जाती है।

स्टील्थ और इंजन को लेकर सवाल

हालांकि Su-57 को लेकर कुछ गंभीर तकनीकी सवाल भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी स्टील्थ क्षमता अमेरिकी F-22 और F-35 की तुलना में कम मानी जाती है। इसके अलावा मौजूदा इंजन पांचवीं पीढ़ी के मानकों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता। रूस भले ही नए इंजन पर काम कर रहा हो, लेकिन उसके ऑपरेशनल होने में अभी समय लग सकता है। यही अनिश्चितता भारत के लिए चिंता का विषय है।

भारत क्यों बना हुआ है सतर्क

भारत पहले भी रूस के साथ पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट प्रोग्राम का हिस्सा रह चुका है, लेकिन लागत, तकनीकी हिस्सेदारी और विमान की परिपक्वता को लेकर मतभेदों के चलते वह कार्यक्रम से बाहर आ गया था। अब भारत किसी भी नई डील में यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसे केवल विमान नहीं, बल्कि स्वदेशी एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूत करने वाला ठोस लाभ मिले। साथ ही, भारत अपने स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोग्राम से कोई समझौता नहीं करना चाहता।

आज की सबसे बड़ी खुशखबरी: बिहार में 7 मेगा भर्ती शुरू, युवाओं की बल्ले-बल्ले

पटना। बिहार के युवाओं के लिए साल 2026 की शुरुआत बड़ी सौगात लेकर आई है। राज्य में एक साथ 7 बड़ी सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे हजारों उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी पाने का सुनहरा मौका मिल रहा है। प्रोफेसर से लेकर कांस्टेबल, सब-इंस्पेक्टर, ऑडिटर और डॉक्टर तक लगभग हर शैक्षणिक वर्ग के लिए अवसर खुले हैं। इन भर्तियों ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं में नई उम्मीद जगा दी है।

1. BPSC प्रोफेसर भर्ती 2026

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 13 प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती के लिए M.Phil या Ph.D योग्यता रखने वाले अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 12 फरवरी 2026 से 6 मार्च 2026 तक चलेगी। यह भर्ती उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है।

2. CSBC कांस्टेबल भर्ती 2026

सेंट्रल सेलेक्शन बोर्ड ऑफ कांस्टेबल (CSBC) ने 83 कांस्टेबल पदों पर भर्ती निकाली है। 12वीं पास उम्मीदवार इसके लिए पात्र हैं। आवेदन 6 फरवरी 2026 से 5 मार्च 2026 तक किए जा सकते हैं। पुलिस सेवा में जाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए यह शानदार मौका है।

3. BPSC ऑडिटर भर्ती 2026

BPSC द्वारा 102 ऑडिटर पदों पर भर्ती की जा रही है। B.A, B.Com, B.Sc, CA, ICWA या MBA/PGDM पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 26 फरवरी 2026 है। यह भर्ती वित्त और लेखा क्षेत्र से जुड़े युवाओं के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

4. BPSSC सब-इंस्पेक्टर भर्ती

बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) ने 78 सब-इंस्पेक्टर (प्रोहिबिशन) पदों पर भर्ती शुरू की है। किसी भी विषय से स्नातक उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन 27 जनवरी 2026 से 27 फरवरी 2026 तक स्वीकार किए जा रहे हैं।

5. BPSSC हवलदार क्लर्क भर्ती 2026

बिहार पुलिस के अंतर्गत होम गार्ड विभाग में 64 हवलदार क्लर्क पदों पर भर्ती निकली है। 10+2 पास उम्मीदवार इसके लिए पात्र हैं। आवेदन प्रक्रिया 2 जनवरी 2026 से 2 फरवरी 2026 तक चली। यह भर्ती पुलिस प्रशासन में स्थायी नौकरी का बेहतरीन अवसर है।

6. BCECE जूनियर रेजिडेंट भर्ती 2026

चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े उम्मीदवारों के लिए भी बड़ी खुशखबरी है। BCECE बोर्ड ने 1445 जूनियर रेजिडेंट पदों पर भर्ती निकाली है। MBBS डिग्रीधारी उम्मीदवार 16 जनवरी 2026 से 6 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम है।

7. BPSC रिसर्च ऑफिसर भर्ती 2026

BPSC ने 3 रिसर्च ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। M.A पास उम्मीदवार इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 18 फरवरी 2026 है। शोध और नीति निर्माण में रुचि रखने वालों के लिए यह खास अवसर है।

सीएम योगी का बड़ा फैसला, इस जिले के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को नई पहचान देने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम और दूरदर्शी फैसला लिया है। शहर को अधिक आकर्षक, भव्य और सांस्कृतिक रूप से विशिष्ट बनाने के उद्देश्य से लखनऊ के सभी सात प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भव्य प्रवेशद्वार विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय को राजधानी के सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है।

राजधानी में प्रवेश करते ही दिखेगी यूपी की पहचान

मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट किया है कि लखनऊ में प्रवेश करते ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत झलकनी चाहिए। हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रवेशद्वार केवल संरचनाएं न हों, बल्कि वे राज्य की पहचान और गौरव के प्रतीक बनें।

हर मार्ग पर दिखेगा अलग सांस्कृतिक स्वरूप

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, लखनऊ से प्रदेश के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर उस स्थान की विरासत को दर्शाने वाले प्रवेशद्वार बनाए जाएंगे।

प्रयागराज मार्ग (रायबरेली रोड) पर त्रिवेणी संगम और महाकुंभ की परंपरा को दर्शाने वाला ‘संगम द्वार’

अयोध्या मार्ग (बाराबंकी रोड) पर भगवान श्रीराम और सूर्यवंश की परंपरा पर आधारित ‘सूर्य द्वार’

मथुरा मार्ग (आगरा रोड) पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को दर्शाने वाला ‘कृष्ण द्वार’

वाराणसी मार्ग (सुल्तानपुर रोड) पर श्री काशी विश्वनाथ धाम की झलक लिए ‘नंदी द्वार’

हस्तिनापुर मार्ग (हरदोई रोड) पर धर्म और न्याय का संदेश देता ‘धर्म द्वार’

नैमिषारण्य मार्ग (सीतापुर रोड) पर ऋषि परंपरा का प्रतीक ‘व्यास द्वार’

झांसी मार्ग (उन्नाव रोड) पर वीरता और शौर्य का प्रतीक ‘शौर्य द्वार’

सभी प्रवेशद्वारों पर उत्तर प्रदेश का राजकीय चिन्ह अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।

पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सौंदर्य का संगम

मुख्यमंत्री योगी ने निर्देश दिए हैं कि प्रवेशद्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रभावी समावेश हो। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, भित्ति चित्र, फव्वारे, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और हरित परिदृश्य के जरिए इन द्वारों को सौंदर्यपूर्ण और अर्थपूर्ण बनाया जाएगा, ताकि यात्रियों को लखनऊ में कदम रखते ही सांस्कृतिक अनुभूति हो।

CSR फंड से होगा निर्माण, समन्वय पर जोर

इन प्रवेशद्वारों के निर्माण के लिए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य तय मानकों के अनुरूप हो और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण समेत सभी संबंधित एजेंसियों से आवश्यक अनुमतियां लेकर समन्वय के साथ काम किया जाए।

बिहार में जमीन रजिस्ट्री को लेकर खुशखबरी, नई व्यवस्था लागू!

पटना। बिहार में भूमि खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री से जुड़े कामकाज में लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। राज्य सरकार ने फरवरी महीने में रविवार को भी निबंधन कार्यालय खोलने का फैसला किया है। इसका मतलब यह है कि अब आम नागरिक सप्ताहांत में भी अपने भूमि लेन-देन और रजिस्ट्री से संबंधित कार्य कर सकेंगे।

किसे मिलेगा फायदा

सरकार का यह कदम खासकर उन लोगों के लिए राहत देगा जो नौकरी, व्यवसाय या अन्य कारणों से सामान्य कार्यदिवस में निबंधन कार्यालय नहीं जा पाते। रविवार को कार्यालय खुलने से लोगों को अतिरिक्त समय मिलेगा और रजिस्ट्री संबंधी कार्यों में सुविधा बढ़ेगी। 

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन छोड़कर बाकी सभी रविवारों में लोग निबंधन कार्यालय जाकर भूमि संबंधी कार्य कर सकते हैं। इससे न केवल लोगों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि कार्यालयों में भीड़ कम होने और कामकाज की गति तेज होने की संभावना भी है।

लंबित मामलों का समाधान

विभाग ने बताया कि रविवार को निबंधन कार्य जारी रखने से लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होगा। साथ ही यह राज्य के राजस्व संग्रह में भी योगदान देगा। कार्यालय में कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी और सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

क्या करना होगा आम नागरिकों को

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि वे रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज पूरे रखें और तय समय पर कार्यालय पहुंचे। यह व्यवस्था न केवल भूमि लेन-देन को आसान बनाएगी, बल्कि बिहार में भूमि प्रशासन को भी और अधिक सुदृढ़ बनाएगी।

बिहार सरकार का फैसला, किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, 50% सब्सिडी!

पटना। बिहार के गन्ना किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन की खबर आई है। राज्य सरकार ने गन्ना बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान देने का ऐलान किया है। यह योजना विशेष रूप से उन किसानों के लिए है जो पांच एकड़ तक की खेती करते हैं। इसका उद्देश्य किसानों की लागत कम करना और गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देना है।

गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग को मजबूती

गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने बताया कि सरकार का लक्ष्य गन्ना उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय में सुधार करना और चीनी मिलों को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराना है। इस दिशा में राज्य सरकार ने बिहार में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का भी निर्णय लिया है।

अनुदान का उद्देश्य केवल सहायता नहीं

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि गन्ना बीज पर 50% अनुदान केवल वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि किसानों को आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली खेती की ओर प्रेरित करने का प्रयास है। इसका मकसद है कि किसान अधिक क्षेत्र में गन्ना की खेती करें और उत्पादन का स्तर बढ़ाएँ।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

गन्ना बीज पर यह अनुदान किसानों की उत्पादन लागत को घटाएगा और खेती में निवेश करने की क्षमता बढ़ाएगा। इससे छोटे और सीमांत किसान भी आधुनिक खेती की तकनीकों का लाभ उठा सकेंगे।

समीक्षा और मार्गदर्शन

इस निर्णय के संबंध में शुक्रवार को विभागीय सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में गन्ना उत्पादन के विस्तार और किसानों के लिए अन्य प्रोत्साहन योजनाओं पर चर्चा हुई। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गन्ना खेती और किसान कल्याण पर विशेष ध्यान दिया जाए।

बिहार में इन शिक्षकों को लगी लॉटरी, सरकार ने दी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। बिहार के भागलपुर जिले के 5867 शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर आई है। लंबे समय से लंबित इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) की प्रक्रिया आखिरकार शुरू कर दी गई है। जिला शिक्षा विभाग और जिला स्थापना शाखा इसे युद्ध स्तर पर पूरा कराने में जुटी हुई है, ताकि जल्द से जल्द सभी शिक्षकों को उनका हक दिया जा सके।

चार दिन में पूरा होगा इंक्रीमेंट

अधिकारियों का लक्ष्य है कि चार दिनों के भीतर पूरे जिले के शिक्षकों का इंक्रीमेंट अपडेट कर दिया जाए। इससे अब तक हो रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी।

इन शिक्षकों को मिलेगा फायदा

विभागीय आंकड़ों के अनुसार टीआरई-1 के 3316 शिक्षकों को दो-दो इंक्रीमेंट मिलेंगे। टीआरई-2 के 1738 शिक्षकों को भी दो इंक्रीमेंट दिए जाएंगे। जबकि टीआरई-3 के 813 शिक्षकों को एक इंक्रीमेंट मिलेगा। जिला स्थापना शाखा के बड़े अधिकारी ने बताया कि इस बार इंक्रीमेंट सीधे वेतन भुगतान से जोड़ दी गई है, जिससे काम में तेजी आई है। अब तक जिले के आठ प्रखंडों में लगभग 40 प्रतिशत शिक्षकों का इंक्रीमेंट अपडेट हो चुका है।

नुकसान का खेल हुआ अब खत्म

इंक्रीमेंट नहीं मिलने की वजह से शिक्षकों को हर महीने तीन से चार हजार रुपये तक का नुकसान हो रहा था। यह समस्या लंबे समय से थी और शिक्षकों की नाराजगी का कारण बनी हुई थी। अब इंक्रीमेंट प्रक्रिया शुरू होने से उनके चेहरे पर राहत झलक रही है।

तकनीकी चुनौती भी आ रही है सामना

जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि एचआरएमएस पोर्टल पर एक-एक कर इंक्रीमेंट अपडेट किया जा रहा है। सर्वर धीमा होने की वजह से थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन अधिकारियों का भरोसा है कि जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी तरह से संपन्न हो जाएगी। बता दें कि बिहार के 37 जिलों में यह काम पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन भागलपुर जिला पिछड़ रहा था। अब इस जिले में प्रक्रिया शुरू होने से शिक्षकों में खुशी हैं।

बिहार में राम-जानकी पथ का रूट फाइनल, इन जिलों को खुशखबरी

सीतामढ़ी। बिहार में राम-जानकी पथ के निर्माण को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या से शुरू होकर मां जानकी की प्रकाट्यस्थली सीतामढ़ी होते हुए नेपाल के जनकपुर तक जाने वाले इस मार्ग का रूट अब अंतिम रूप दे दिया गया है।

सीतामढ़ी के 35 गांव शामिल

सीतामढ़ी जिले में कुल 35 गांवों को इस मार्ग में शामिल किया गया है। इसमें सीतामढ़ी नगर निगम क्षेत्र के साथ-साथ परसौनी, रीगा, बथनाहा, परिहार और सुरसंड ब्लॉक के गांव शामिल हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इन गांवों की सूची जारी कर दी है।

इस मार्ग की विशेषताएँ

राम-जानकी मार्ग मशरख, चकिया, शिवहर, सीतामढ़ी और भिट्ठामोड़ होते हुए फोरलेन एनएच 27ए और एनएच 227 तक फैलेगा। इस मार्ग की लंबाई लगभग 240 किलोमीटर होगी और इसका निर्माण इसी वर्ष शुरू होने की संभावना है। मार्ग का डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने की जिम्मेदारी थीम इंजीनियरिंग कंसलटेंट को दी गई है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

इस मार्ग के निर्माण से धार्मिक स्थलों को भी जोड़ने की योजना है। इसमें मां जानकी की प्रकाट्यस्थली पुनौराधाम मंदिर, श्री हलेश्वर नाथ महादेव मंदिर और पंथपाकड़ धाम जैसे पवित्र स्थल शामिल होंगे। यह मार्ग न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।

इस सड़क के निर्माण और लागत

चकिया से सीतामढ़ी-भिट्ठामोड़ का मार्ग लगभग 101 किलोमीटर लंबा है। इस खंड के निर्माण पर लगभग 2100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। डीपीआर में मशरख से चकिया और शिवहर से भिट्ठामोड़ तक के निर्माण को भी शामिल किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 1450 करोड़ रुपये है।

भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक व्यवस्था

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निदेशक कमलेश कुमार सिंह ने इस प्रोजेक्ट के लिए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को मुख्य जिम्मेदार अधिकारी नियुक्त किया है। इसके तहत सभी आवश्यक भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक कार्य तेजी से पूरा किए जाएंगे।

यूपी में खुशखबरी का तड़का, 3 मेगा भर्ती चालू, करें आवेदन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य में तीन मेगा भर्ती प्रक्रिया इस समय चालू हो गई है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में आवेदन किए जा सकते हैं। ये भर्तियां न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाएंगी, बल्कि युवाओं को सरकारी क्षेत्र में स्थिर कैरियर बनाने का मौका भी देंगी।

1. बलरामपुर जिले में असिस्टेंट वेटेरिनरी फील्ड ऑफिसर भर्ती

बलरामपुर जिला प्रशासन ने Assistant Veterinary Field Officer पदों के लिए भर्ती नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती पशुपालन और कृषि क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर है।

योग्यता: डिप्लोमा धारक उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया: ऑफलाइन आवेदन किया जाएगा।

आवेदन की तिथि: 27 जनवरी 2026 से 16 फरवरी 2026 तक।

आवेदन लिंक: Balrampur District Website

2. यूपी आंगनवाड़ी वर्कर भर्ती

राज्य में 202 आंगनवाड़ी वर्कर पदों के लिए भी आवेदन शुरू हो गए हैं। यह भर्ती खासकर उन उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सामाजिक सेवा और बच्चों के शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।

योग्यता: 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन।

आवेदन की तिथि: 8 जनवरी 2026 से 2 फरवरी 2026 तक।

आवेदन लिंक: UP Anganwadi Bharti

3. रानी लक्ष्मीबाई सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (RLBCAU) भर्ती

रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ के लिए 75 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। इस भर्ती के जरिए उम्मीदवार उच्च शिक्षा और अनुसंधान क्षेत्र में सरकारी नौकरी पाने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

योग्यता और पद विवरण: पदों के लिए पात्रता, आयु सीमा और चयन प्रक्रिया विश्वविद्यालय की आधिकारिक अधिसूचना में दी गई है।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन।

आवेदन की तिथि: 22 जनवरी 2026 से 21 फरवरी 2026 तक।

आवेदन लिंक: RLBCAU Official Website

कल बनेगा पुष्य राज योग: 5 राशियों को मिलेगा हर क्षेत्र में लाभ

राशिफल। हिंदू पंचांग के अनुसार कल यानी 1 फरवरी 2026 (रविवार) को पुष्य नक्षत्र में रवि पुष्य योग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन किए गए कार्य विशेष रूप से सफल, लाभकारी और स्थायी परिणाम देते हैं।

पुष्य नक्षत्र को हिंदू ज्योतिष में शुभता, समृद्धि और मान-सम्मान का नक्षत्र माना जाता है। जब यह नक्षत्र रविवार के साथ जुड़ता है, तो इसे पुष्य राज योग कहा जाता है। इस दिन की शुरुआत से लेकर शाम तक किए गए कार्यों में धन, सफलता और उन्नति के योग बनते हैं।

किन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव

1. मेष राशि

मेष राशि वाले करियर और वित्तीय मामलों में अचानक लाभ महसूस कर सकते हैं। नौकरीपेशा जातकों को प्रमोशन या सम्मान मिलने की संभावना है। इस दिन नए प्रोजेक्ट या निवेश की योजना बनाना विशेष रूप से शुभ रहेगा।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह दिन धन लाभ, संपत्ति और पारिवारिक सुख-शांति का योग लाएगा। व्यापारियों और निवेशकों के लिए भी यह दिन लाभकारी साबित हो सकता है।

3. कर्क राशि

कर्क राशि वाले पारिवारिक जीवन में खुशियाँ महसूस करेंगे। संबंधों में मजबूती आएगी और सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल लोगों के लिए भी यह दिन शुभ संकेत देता है।

4. कन्या राशि

कन्या राशि के जातक कार्यक्षेत्र में उत्कृष्ट परिणाम पाएंगे। करियर में उन्नति और नए अवसर मिल सकते हैं। निवेश और साझेदारी से जुड़े मामलों में भी सफलता के संकेत हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि के जातक अपने करियर में मान-सम्मान और पदोन्नति के अवसर प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन प्रतिष्ठित निर्णय और आय बढ़ाने के लिए अनुकूल रहेगा।

यूपी में आशा व आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने आशा बहनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को लेकर एक अहम फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी अल्प-वेतनभोगी कर्मियों का मानदेय हर माह निश्चित तिथि पर सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचना चाहिए। इस फैसले से लाखों महिला कर्मियों को आर्थिक स्थिरता और मानसिक राहत मिलने की उम्मीद है।

राज्य देगा समय पर भुगतान

मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया है कि जिन योजनाओं में केंद्र सरकार से अंशदान मिलता है, वहां केंद्रांश में देरी को भुगतान में बाधा नहीं बनने दिया जाए। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार अपने संसाधनों से समय पर मानदेय जारी करेगी, ताकि किसी भी आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

तुरंत लागू करने के निर्देश

सरकार ने इस व्यवस्था को शीघ्र प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके लिए संबंधित विभागों को भुगतान प्रणाली की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने को कहा गया है। डिजिटल माध्यमों और डीबीटी व्यवस्था के जरिए भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर जोर दिया गया है।

जमीनी स्तर पर सेवाओं को मजबूती

आशा बहनें और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य, पोषण और मातृ-शिशु देखभाल की रीढ़ मानी जाती हैं। समय पर मानदेय मिलने से उनका मनोबल बढ़ेगा और वे अपनी जिम्मेदारियों को और बेहतर तरीके से निभा सकेंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

यह फैसला केवल भुगतान व्यवस्था सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सम्मान से भी जोड़कर देखा जा रहा है। नियमित आय से कर्मियों को घरेलू और पारिवारिक जरूरतें पूरी करने में आसानी होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि प्रदेश सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। समय पर भुगतान अब प्राथमिकता होगी, न कि औपचारिकता।

यूको बैंक में 173 पदों पर भर्ती, 2 फरवरी तक करें आवेदन

नई दिल्ली। सरकारी बैंक में करियर बनाने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार मौका सामने आया है। यूको बैंक ने वर्ष 2026 के लिए जनरलिस्ट और स्पेशलिस्ट ऑफिसर के 173 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत स्नातक से लेकर इंजीनियरिंग, एमबीए और चार्टर्ड अकाउंटेंट डिग्री धारकों को आवेदन का अवसर दिया गया है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन करने की अंतिम तिथि 2 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार यूको बैंक की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

किन पदों पर होगी भर्ती

इस भर्ती के तहत बैंक में जनरलिस्ट ऑफिसर और विभिन्न स्पेशलिस्ट ऑफिसर पदों को भरा जाएगा। कुल रिक्त पदों की संख्या 173 रखी गई है, जिससे बैंकिंग सेक्टर में नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ा अवसर मिलेगा।

योग्यता और पात्रता

इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता काफी विविध रखी गई है। उम्मीदवार के पास किसी भी विषय में स्नातक डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा बीई/बीटेक, एमसीए, कंप्यूटर साइंस में एमएससी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, या पूर्णकालिक दो वर्षीय एमबीए अथवा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा धारक भी आवेदन के पात्र हैं।

आयु सीमा और वेतन

भर्ती के लिए उम्मीदवार की आयु 20 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आरक्षित वर्गों को नियमानुसार आयु में छूट दी जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को 48,480 रुपये से 93,960 रुपये तक का आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो बैंकिंग क्षेत्र के हिसाब से काफी प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है।

चयन और आवेदन

चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन परीक्षा और इंटरव्यू शामिल हो सकता है, जिसकी विस्तृत जानकारी बैंक द्वारा आधिकारिक नोटिफिकेशन में दी गई है। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

यूपी सरकार ने बढ़ाई शक्ति: अब 50 करोड़ तक के प्रोजेक्ट को मंजूरी दे सकेंगे मंत्री

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विकास परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्त विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार सीधे विभागीय मंत्रियों को दिया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की स्वीकृति वित्त मंत्री करेंगे, जबकि इससे अधिक लागत वाली परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से ही मिलेगी।

फैसले से तेज होगी विकास योजनाओं की रफ्तार

सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फाइलों की अनावश्यक देरी खत्म होगी और विकास कार्यों को समय पर हरी झंडी मिल सकेगी। खासकर सड़क निर्माण, भवन निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं को इससे गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोक निर्माण विभाग की सड़कों की तरह अब शासकीय भवनों के निर्माण में भी पांच साल की अनुरक्षण (मेंटेनेंस) गारंटी अनिवार्य होगी। इससे निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने और लंबे समय तक सुरक्षित संरचनाएं सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

तय समय पर स्वीकृत होंगी कार्ययोजनाएं

बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि अपनी वार्षिक कार्ययोजना हर हाल में 15 अप्रैल तक स्वीकृत करा लें। यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होती है, तो संबंधित विभाग को कारण स्पष्ट करते हुए दोबारा अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।

वित्तीय सुधारों पर सरकार का फोकस

बैठक में नीति आयोग और आरबीआई की रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया कि उत्तर प्रदेश की वित्तीय स्थिति में लगातार सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कोषागार, बजट प्रबंधन और पेंशन प्रणाली में डिजिटल सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट और नई वर्गीकरण प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।

यूपी में इस सड़क का चौड़ीकरण, इन जिलों के लिए खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश के बांदा से कानपुर की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए राहत की खबर है। बांदा–बहराइच स्टेट हाईवे के एक अहम हिस्से को अब फोरलेन में बदला जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने पपरेंदा से चिल्ला तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण का काम शुरू कर दिया है। 

इस सड़क के चौड़ीकरण से इस इलाके में लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से निजात मिलने की उम्मीद है। यह मार्ग बांदा, फतेहपुर के ललौली क्षेत्र से होकर कानपुर की ओर जाता है और रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही का प्रमुख रास्ता है।

बाजार और कस्बों में लगने वाले जाम से मिलेगी राहत

बांदा–बहराइच स्टेट हाईवे के किलोमीटर 284 से 301 के बीच पपरेंदा, अतरहट, बगिया, पलरा, सहूरपुर, घूरा, दोहतरा, बच्चा डेरा, तारा और चिल्ला जैसे गांव और कस्बे आते हैं। सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण यहां आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती थी। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने-जाने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

136 करोड़ से ज्यादा की लागत

इस सड़क परियोजना पर कुल 136.91 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य के लिए पहली किस्त के रूप में 49.93 करोड़ रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। इसके तहत सड़क का चौड़ीकरण, डिवाइडर, बेहतर ड्रेनेज और सुंदरीकरण का काम भी किया जाएगा।

कई जिलों को होगा सीधा फायदा

सड़क के फोरलेन बनने से बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के सतना और पन्ना से आने-जाने वाले वाहनों का सफर आसान हो जाएगा। इससे यात्रा का समय घटेगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और क्षेत्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।

यूपी सरकार का 1 बड़ा फैसला, 1 फरवरी से होगा लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों व फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य कैबिनेट ने संपत्ति की रजिस्ट्री में आधार-आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह नई व्यवस्था 1 फरवरी से प्रदेश के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से फर्जी रजिस्ट्रेशन, जमीन घोटाले और पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगेगी।

आधार से होगी पहचान की पुख्ता जांच

स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि संपत्ति रजिस्ट्री में आधार के माध्यम से पहचान सत्यापन का निर्णय पहले ही अगस्त 2024 में लिया गया था। अब इसे कैबिनेट की मंजूरी के बाद लागू किया जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, और ई-हस्ताक्षर के जरिए निष्पादक, क्रेता-विक्रेता और गवाहों की पहचान इलेक्ट्रॉनिक रूप से सत्यापित की जाएगी। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होगा कि रजिस्ट्री में शामिल सभी व्यक्ति वास्तविक हैं और किसी भी प्रकार की फर्जी पहचान का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि आधार-आधारित प्रमाणीकरण से न केवल धोखेबाजों पर रोक लगेगी, बल्कि पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। आम नागरिकों को भी इससे बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि जमीन से जुड़े विवादों की संभावना कम होगी।

बिहार के इस जिले के लिए खुशखबरी, बिजली उत्पादन का बड़ा हब बनने की तैयारी

भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जिले के पीरपैंती प्रखंड में अदाणी समूह द्वारा 2400 मेगावाट क्षमता वाले अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की स्थापना की दिशा में प्रक्रिया तेज़ हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए गुरुवार को प्रखंड कार्यालय परिसर में पर्यावरणीय जन सुनवाई का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने भारी समर्थन जताया।

यह जन सुनवाई बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता एडीएम (विधि-व्यवस्था) राकेश रंजन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्राधिकारी शंभुनाथ झा ने की। सुनवाई के दौरान विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने हाथ उठाकर परियोजना के समर्थन में अपनी सहमति दी, जिससे साफ संकेत मिला कि स्थानीय समाज इस परियोजना को लेकर सकारात्मक है।

विकास और रोजगार की नई उम्मीद

जन सुनवाई में मौजूद ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि पावर प्लांट की स्थापना से क्षेत्र का समग्र विकास होगा। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। वक्ताओं ने कहा कि पावर प्लांट के शुरू होने के बाद पीरपैंती एक तरह से “रोजगार का पावर हाउस” बन जाएगा, जिससे युवाओं को काम की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।

औद्योगिक विकास यात्रा को रफ्तार

वक्ताओं ने यह भी कहा कि यह परियोजना सिर्फ पीरपैंती या भागलपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे बिहार की औद्योगिक और आर्थिक विकास यात्रा को गति देगी। बड़े स्तर पर बिजली उत्पादन होने से राज्य में उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश का माहौल और बेहतर होगा।

पर्यावरण संरक्षण पर दिया गया भरोसा

इस अवसर पर अदाणी समूह के वरीय पर्यावरण पदाधिकारी आर.एन. शुक्ला ने परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पावर प्लांट में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का सख्ती से पालन होगा। प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र विकास और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएंगे।

आपको बता दें की इस जन सुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने पर्यावरण सुरक्षा, स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और क्षेत्रीय विकास कार्यों को लेकर अपनी अपेक्षाएं रखीं, जिस पर परियोजना प्रबंधन की ओर से सकारात्मक आश्वासन दिया गया।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 350 पदों पर भर्ती, आवेदन शुरू

नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने वर्ष 2026 के लिए 350 पदों पर भर्ती की घोषणा की है। यह भर्ती विशेषज्ञ श्रेणी के अंतर्गत फॉरेन एक्सचेंज ऑफिसर और मार्केटिंग ऑफिसर पदों के लिए निकाली गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

20 जनवरी से शुरू हुए आवेदन

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी सूचना के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और 3 फरवरी 2026 तक चलेगी। उम्मीदवार बैंक की आधिकारिक वेबसाइट centralbankofindia.bank.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

किन पदों पर होगी भर्ती

इस भर्ती अभियान के तहत दो प्रमुख पद शामिल हैं, फॉरेन एक्सचेंज ऑफिसर (स्केल III) और मार्केटिंग ऑफिसर (स्केल I), कुल मिलाकर 350 रिक्त पदों को भरा जाएगा। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति भारत में कहीं भी की जा सकती है।

योग्यता और पात्रता

इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होना अनिवार्य है। वहीं, संबंधित पदों के लिए एमबीए या पीजीडीएम जैसी प्रोफेशनल डिग्री धारकों को वरीयता दी जाएगी। विस्तृत योग्यता मानदंड बैंक की अधिसूचना में उपलब्ध हैं।

आकर्षक वेतनमान

चयनित अभ्यर्थियों को बैंक की ओर से आकर्षक वेतन दिया जाएगा। स्केल III पद के लिए वेतन लगभग ₹85,920 से ₹1,05,280 प्रति माह, स्केल I पद के लिए वेतन ₹48,480 से ₹85,920 प्रति माह निर्धारित किया गया है, इसके अलावा बैंक के नियमों के अनुसार अन्य भत्ते भी मिलेंगे।

परीक्षा और चयन

इन पदों के लिए परीक्षा का आयोजन फरवरी या मार्च 2026 में संभावित है। चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हो सकते हैं। परीक्षा से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।

युवाओं के लिए मौका

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए सुनहरा अवसर है, जो बैंकिंग क्षेत्र में विशेषज्ञ अधिकारी के रूप में अपना करियर बनाना चाहते हैं। सीमित समय को देखते हुए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

कर्ज में डूबी दुनिया! पहले नंबर पर कौन, भारत किस नंबर पर खड़ा?

नई दिल्ली। दुनिया इस समय रिकॉर्ड स्तर के कर्ज के दौर से गुजर रही है। जनवरी 2026 तक उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारी कर्ज के दबाव में हैं। कहीं युद्ध और रक्षा खर्च वजह बने हैं, तो कहीं बढ़ती आबादी, कल्याणकारी योजनाएं और लंबे समय से चला आ रहा राजकोषीय घाटा चिंता का कारण बन रहा है।

अमेरिका बना दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार

कर्ज के मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका अब भी पहले स्थान पर है। अमेरिका पर कुल सरकारी कर्ज का अनुमान करीब 38 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा लगाया जा रहा है, जो वैश्विक सार्वजनिक कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत जरूर है, लेकिन रिजर्व करेंसी की स्थिति, ऊंचा सैन्य बजट, सामाजिक योजनाओं पर भारी खर्च और बार-बार बजट घाटा उसे लगातार उधार लेने के लिए मजबूर कर रहा है।

चीन दुनिया का दूसरा सबसे कर्जदार देश

अमेरिका के बाद चीन दूसरे नंबर पर है। चीन का सरकारी कर्ज लगभग 18 ट्रिलियन डॉलर के आसपास आंका जा रहा है। इसकी बड़ी वजह बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश, स्थानीय सरकारों का उधार और आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए किए गए प्रोत्साहन पैकेज हैं।

जापान दुनिया का तीसरा सकते कर्जदार 

तीसरे स्थान पर जापान है, जिस पर करीब 9–10 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। जापान की आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है और लंबे समय से कम ब्याज दरों की नीति ने कर्ज को काफी बढ़ा दिया है।

कर्ज के मामले में यूरोप की क्या है स्थिति?

यूनाइटेड किंगडम पर लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज हैं। जबकि फ्रांस पर करीब 3.9 ट्रिलियन डॉलर और इटली पर लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर का सरकारी कर्ज है।

कर्ज के मामले में भारत की स्थिति क्या है?

कुल सरकारी कर्ज के लिहाज से भारत दुनिया में सातवें स्थान पर है। भारत का कुल कर्ज और देनदारी करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर के आसपास मानी जा रही है।

कर्ज-से-जीडीपी अनुपात ज्यादा मायने क्यों रखता है?

किसी देश की कर्ज चुकाने की क्षमता समझने के लिए कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को ज्यादा अहम माना जाता है। इस पैमाने पर कुछ देश बेहद गंभीर स्थिति में हैं। उदाहरण के तौर पर, सूडान का कर्ज उसकी जीडीपी के 220 प्रतिशत से भी ज्यादा बताया जा रहा है, जो उसे सबसे अधिक दबाव वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करता है। बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जापान का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 237 प्रतिशत है, जो बेहद ऊंचा माना जाता है।

वहीं, इस पैमाने पर भारत का कर्ज-से-जीडीपी अनुपात लगभग 82 प्रतिशत के आसपास है। वैश्विक रैंकिंग में यह स्थिति भारत को लगभग 31वें से 35वें स्थान के बीच रखती है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2031 तक इस अनुपात को घटाकर करीब 50 प्रतिशत के स्तर पर लाया जाए। वहीं, भारत की सबसे बड़ी मजबूती यह है कि उसका 95 प्रतिशत से अधिक कर्ज घरेलू स्रोतों से लिया गया है। इसका मतलब यह है कि विदेशी मुद्रा और बाहरी भुगतान से जुड़े जोखिम काफी कम हैं।

पेशाब में जलन गंभीर बीमारी के हैं संकेत, न करें नजरअंदाज!

हेल्थ डेस्क। पेशाब के दौरान जलन या दर्द होना एक आम समस्या लग सकती है, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार यह कई बार गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। बदलती जीवनशैली, खानपान में लापरवाही और पर्याप्त पानी न पीने की आदत के कारण यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

1 .मूत्र संक्रमण का प्रमुख लक्षण

पेशाब में जलन का सबसे सामान्य कारण मूत्र मार्ग संक्रमण (यूरिन इंफेक्शन) माना जाता है। यह संक्रमण बैक्टीरिया के कारण होता है और महिलाओं में इसकी संभावना अधिक रहती है। बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय दर्द, बदबूदार या गाढ़ा पेशाब इसके प्रमुख लक्षण हैं।

2 .डिहाइड्रेशन भी हो सकता है वजह

शरीर में पानी की कमी होने पर पेशाब गाढ़ा हो जाता है, जिससे जलन की समस्या हो सकती है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है।

3 .किडनी स्टोन और अन्य बीमारियाँ

पेशाब में जलन कभी-कभी किडनी स्टोन, प्रोस्टेट संबंधी समस्या या यौन संचारित रोगों का संकेत भी हो सकती है। यदि जलन के साथ खून आना, तेज दर्द या बुखार हो, तो इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।

4 .महिलाओं और पुरुषों में अलग-अलग कारण

महिलाओं में यह समस्या हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था या साफ-सफाई में कमी के कारण हो सकती है, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि से जुड़ी समस्याएं भी पेशाब में जलन का कारण बन सकती हैं।

कब जाएं डॉक्टर के पास: यदि पेशाब में जलन दो-तीन दिन से अधिक बनी रहे, बार-बार पेशाब आए, या दर्द बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उपचार से बड़ी बीमारी से बचा जा सकता है।

यूपी में 'कर्मचारियों' के लिए खुशखबरी, सरकार ने दिए आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्प-वेतनभोगी कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आशा बहनें, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य मानदेय पर काम करने वाले कर्मियों को उनका भुगतान हर माह तय तारीख पर सीधे बैंक खातों में पहुंचना चाहिए। किसी भी स्तर पर देरी को अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि जिन योजनाओं में केंद्र सरकार से आंशिक सहायता मिलती है, वहां राज्य सरकार अपने संसाधनों से भुगतान समय पर करे, ताकि कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी न हो। इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

वित्तीय व्यवस्था की समीक्षा में दिए अहम निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह निर्देश शुक्रवार को वित्त विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक के दौरान दे रहे थे। बैठक में उन्होंने प्रदेश की वित्तीय स्वीकृति प्रणाली को और अधिक सरल, तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभागीय मंत्री स्तर पर 10 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को स्वीकृति दी जाती है, जिसे बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया जाना चाहिए। वहीं, 50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को वित्त मंत्री स्तर पर और 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया।

समय पर मंजूरी से तेज होगा विकास कार्य

मुख्यमंत्री का मानना है कि स्वीकृति की यह नई व्यवस्था लागू होने से परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी मिलेगी और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होगी। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजनाएं हर हाल में 15 अप्रैल तक स्वीकृत करा लें। यदि कोई विभाग तय समयसीमा का पालन नहीं करता है, तो उसकी जानकारी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। इससे विभागीय जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित किया जाएगा।

लागत बढ़ने पर फिर लेनी होगी अनुमति

मुख्यमंत्री योगी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी परियोजना की लागत में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होती है, तो संबंधित विभाग को कारणों के साथ पुनः अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। इससे अनियंत्रित खर्च और बजट गड़बड़ी पर रोक लगेगी।

राज्य गारंटी पॉलिसी लागू करने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में स्टेट गारंटी पॉलिसी लागू करने के निर्देश भी दिए। इससे राज्य की वित्तीय विश्वसनीयता बढ़ेगी और निवेश व विकास परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, यूपीवासियों के लिए खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में घर या दुकान बनाने वालों के लिए खुशखबरी है। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025 के तहत नक्शा पास करने की प्रक्रिया को सरल और किफायती बनाने के लिए कई अहम फैसले किए हैं। इसका मकसद लोगों की परेशानियों को कम करना, भ्रष्टाचार घटाना और निर्माण कार्य को तेज करना है।

छोटे प्लॉट वालों को मिली बड़ी राहत

सबसे बड़ी राहत छोटे प्लॉट मालिकों को मिली है। अब:100 वर्ग मीटर तक के घर और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक प्लॉट के लिए नक्शा पास कराने की जरूरत नहीं है। यानी छोटे निर्माण में अब लोग बिना किसी अनुमति के सीधे निर्माण शुरू कर सकते हैं। यह नियम सितंबर 2025 से लागू हो गया है। इससे लाखों छोटे प्लॉट मालिकों को प्राधिकरण के चक्कर और भारी फीस से राहत मिली है।

नक्शा पास का ऑनलाइन सिस्टम

सरकार ने FASTPAS नाम का नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। 2026 की शुरुआत में लागू हुए इस सिस्टम के जरिए लोग map.up.gov.in पर अपने नक्शे अपलोड कर सकते हैं। यह ट्रस्ट-बेस्ड सिस्टम है, यानी सरकार आवेदक पर भरोसा करती है कि सभी जानकारी सही हैं। छोटे प्लॉट्स का नक्शा मिनटों में self-approved हो जाता है। रजिस्ट्रेशन फीस ₹1 है। आधार ई-केवाईसी अनिवार्य है ताकि फर्जीवाड़ा रोका जा सके।

उद्योगों के लिए भी राहत

छोटे उद्योगों के नक्शा पास के लिए बाह्य विकास शुल्क (EDC) में भी कमी की गई है। नगर निकाय सीमा के बाहर छोटे उद्योगों पर कम दरें लागू की गई हैं। इससे उद्योग लगाने वालों को बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि, कुछ बड़े शहरों में विकास शुल्क बढ़ाया गया है, लेकिन छोटे निर्माण और उद्योगों पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है।

फीस में भारी कटौती

जहां नक्शा पास जरूरी है, वहां फीस को बेहद कम कर दिया गया है। छोटे भवनों के लिए नक्शा पास की फीस सिर्फ ₹1 रखी गई है। इससे पहले यह शुल्क क्षेत्रफल के आधार पर सैकड़ों या हजारों रुपये तक होता था।

कर्मचारियों के लिए अपडेट: 8वें वेतन आयोग में CVO की एंट्री

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक खुशखबरी आई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक आठवें वेतन आयोग की प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए चीफ विजिलेंस अधिकारी (CVO) की नियुक्ति की गई है। यह कदम केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ है।

प्रवीण वशिष्ठ बने आठवें वेतन आयोग के CVO

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, प्रवीण वशिष्ठ को आठवें वेतन आयोग का चीफ विजिलेंस अधिकारी नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति 16 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। यह नियुक्ति आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

CVO का रोल: निगरानी और पारदर्शिता

CVO को अक्सर किसी सरकारी संस्था या आयोग का “वॉचडॉग” माना जाता है। उनका मुख्य कार्य यह देखना होता है कि फाइलों की प्रक्रिया, नियुक्तियां, टेंडर या वित्तीय फैसलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात या भ्रष्टाचार न हो। आठवें वेतन आयोग के मामले में CVO की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि फिटमेंट फैक्टर, बेसिक पे स्ट्रक्चर, भत्तों में बदलाव और पेंशन रिवीजन जैसे महत्वपूर्ण निर्णय नियमों के तहत निष्पक्ष रूप से लिए जाएँ।

पिछले एक साल में आयोग की प्रगति

पिछले वर्ष आठवें वेतन आयोग की दिशा में कई अहम कदम उठाए गए:

15 जनवरी 2025: आयोग के गठन की शुरुआती घोषणा

28 अक्टूबर 2025: आयोग का औपचारिक गठन

3 नवंबर 2025: टर्म ऑफ रेफरेंस जारी, जिम्मेदारियों का निर्धारण

जनवरी 2026: आयोग को आधिकारिक कार्यालय मिला

28 जनवरी 2026: CVO की नियुक्ति

इन सभी कदमों से स्पष्ट है कि सरकार आयोग के काम को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। CVO की नियुक्ति के बाद संकेत मजबूत हो गए हैं कि सरकार आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों को गंभीरता से ले रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाह अब फिटमेंट फैक्टर, संभावित सैलरी बढ़ोतरी और उसके लागू होने की समयसीमा पर टिकी है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: किसानों के लिए खुशखबरी, 38 जिलों में लागू

पटना। बिहार सरकार ने किसानों के लिए एक नई खुशखबरी दी है। राज्य सरकार की फूल (गेंदा) विकास योजना 2025-26 के तहत किसानों को गेंदा फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना और वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करना है।

गेंदा फूल की खेती क्यों फायदेमंद है?

गेंदा फूल सालभर बाजार में मांग में रहता है। खासतौर पर त्योहारों और शादियों के सीजन में इसकी कीमत और मांग दोनों बढ़ जाती हैं। कम लागत में इसकी खेती की जा सकती है और प्रति हेक्टेयर अच्छी पैदावार होने के कारण किसान इसका अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

योजना के तहत सरकार की मदद

सरकार की ओर से गेंदा फूल की खेती करने वाले किसानों को 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है। खेती की अनुमानित लागत प्रति हेक्टेयर 80,000 रुपये है, जिसमें सरकार 40,000 रुपये तक का अनुदान सीधे बैंक खाते में देती है।

योजना में शामिल होने की योग्यता

1 .योजना राज्य के सभी 38 जिलों में लागू है।

2 .एक किसान न्यूनतम 0.1 हेक्टेयर और अधिकतम 2 हेक्टेयर तक भूमि पर योजना का लाभ ले सकता है।

3 .बिना जमीन वाले किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें एक एकरारनामा के आधार पर आवेदन करना होगा।

4 .इसके लिए आवेदन DBT पोर्टल पर ऑनलाइन किया जा सकता है। चयन प्रक्रिया पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगी।

कैसे मिलेगा लाभ?

ब्लॉक के उद्यान अधिकारी और जिला अधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। इससे किसानों को त्वरित और पारदर्शी लाभ मिलता है। इस योजना के पीछे सरकार का मकसद सिर्फ किसानों की आय बढ़ाना ही नहीं बल्कि वैकल्पिक और लाभकारी खेती को बढ़ावा देना भी है। पारंपरिक फसलों के साथ गेंदा फूल की खेती करके किसान अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।

योगी सरकार का बड़ा फैसला: PCS-J भर्ती में नए नियम लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में न्यायिक सेवा में बड़ी खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की न्यायिक सेवा नियमावली, 2001 में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पीसीएस-जे (सिविल जज) भर्ती में विधि व्यवसाय का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। अब सीधे परीक्षा में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास कम से कम तीन साल का प्रैक्टिस अनुभव होना जरूरी होगा।

संशोधन की मंजूरी और प्रक्रिया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गुरुवार को उप्र न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। यह कदम उच्च न्यायालय की संस्तुति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में तीन वर्ष का विधि प्रैक्टिस अनुभव अनिवार्य करने का आदेश दिया था, जिसे अब उत्तर प्रदेश सरकार ने लागू किया है।

नए नियम क्या हैं?

अब पीसीएस-जे की सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवार का कम से कम तीन वर्ष का विधि व्यवसाय/वकालत अनुभव होना अनिवार्य है। यह नियम शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है। इससे पहले केवल एलएलबी होना ही पीसीएस-जे परीक्षा के लिए पर्याप्त था।

अन्य बदलाव और सुधार

सिर्फ भर्ती तक ही सीमित नहीं, नए संशोधन में प्रशिक्षण और पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी सुधार किया गया है। साथ ही प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नए नियम भी जोड़े गए हैं।

इस बदलाव का महत्व

सरकार का कहना है कि ये सुधार न केवल भर्ती प्रक्रिया को कठोर और व्यवस्थित बनाएंगे, बल्कि न्यायिक सेवा की गुणवत्ता और प्रशिक्षण के स्तर को भी बेहतर बनाएंगे। इससे प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी, और न्याय के त्वरित एवं प्रभावी वितरण में मदद मिलेगी।