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8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की मांग तेज?

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें इन दिनों 8वें वेतन आयोग पर टिकी हैं। आयोग अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और अन्य हितधारकों के साथ बैठक कर उनकी मांगें सुन रहा है। इसी कड़ी में 7 और 8 सितंबर को चेन्नई में बैठक हुई, जबकि 9 सितंबर को पुडुचेरी में आयोग की बैठक होनी है।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग

चेन्नई में हुई बैठक के दौरान कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने वेतन और पेंशन से जुड़े कई मुद्दे आयोग के सामने रखे। इनमें पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग भी शामिल रही। इसके अलावा पेंशन और पारिवारिक पेंशन में बढ़ोतरी, कम्यूटेशन से जुड़ी राहत और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की मांग उठाई गई।

₹68 हजार न्यूनतम वेतन की मांग

बैठक में न्यूनतम वेतन बढ़ाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने न्यूनतम वेतन ₹68,000 करने और मौजूदा वेतन मैट्रिक्स की जगह रनिंग स्केल लागू करने की मांग रखी। इसके साथ ही कर्मचारियों के भत्तों, पदोन्नति और करियर में आगे बढ़ने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

डाक कर्मचारियों के मुद्दे भी उठे गए 

चेन्नई जीपीओ पेंशनर्स फोरम के प्रतिनिधियों ने डाक कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े विषयों को भी आयोग के सामने रखा। बेहतर वेतनमान, पदोन्नति के अवसर और कर्मचारियों के लिए सुविधाओं में सुधार की मांग की गई। महिला कर्मचारियों और दिव्यांग कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान देने की बात कही गई।

9 सितंबर को पुडुचेरी में होगी बैठक

8वां केंद्रीय वेतन आयोग 9 सितंबर को पुडुचेरी में हितधारकों के साथ विचार-विमर्श करेगा। इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स की ओर से रखी जा रही मांगों को आयोग अपनी प्रक्रिया में शामिल करेगा। हालांकि, पुरानी पेंशन बहाली या ₹68,000 न्यूनतम वेतन पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ये फिलहाल कर्मचारी संगठनों की मांगें हैं।

यूपी स्टेट कैपिटल रीजन के बेस मैप को मंजूरी, 6 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट कैपिटल रीजन यानी यूपीएससीआर के गठन की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ा है। समीक्षा समिति ने छह जिलों को शामिल करने वाले क्षेत्र के बेस मैप को मंजूरी दे दी है। अब इसे अंतिम अनुमोदन के लिए कार्यकारी समिति के सामने रखा जाएगा। इसके बाद क्षेत्रीय महायोजना तैयार करने का काम शुरू होगा।

छह जिलों को मिलेगा विकास का फायदा

यूपीएससीआर में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली को शामिल किया गया है। इन छह जिलों का कुल क्षेत्रफल करीब 26,741 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्र के विकास के लिए जीआईएस आधारित क्षेत्रीय महायोजना तैयार की जाएगी। इसका मकसद अलग-अलग जिलों के विकास को एक साझा योजना से जोड़ना है।

सड़क से लेकर रेल और मेट्रो तक पर जोर

यूपीएससीआर के तहत करीब 30 प्रमुख परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं। इनमें क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क, एलिवेटेड परिधीय सड़क, सड़क सुधार, परिवहन नगर, परिक्रमा रेल गलियारा और मेट्रो नेटवर्क जैसी योजनाएं शामिल हैं। इससे राजधानी लखनऊ और आसपास के जिलों के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है।

निवेश और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक पार्क, फूड पार्क और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के आसपास विकास की योजनाएं भी प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं से निवेश बढ़ने के साथ रोजगार और कारोबार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

2,239 स्थानों पर हुआ जमीन पर सत्यापन

बेस मैप को तैयार करने से पहले इसकी सटीकता जांचने के लिए छह जिलों में 2,239 स्थानों का स्थलीय सत्यापन कराया गया। इसके अलावा 22 संबंधित विभागों और संस्थाओं से भी सहमति ली गई। अब अंतिम मंजूरी के बाद क्षेत्रीय महायोजना तैयार होगी, जिसके जरिए बुनियादी सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

सरकार का जोर इस क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचाने पर भी है। अधिकारियों के मुताबिक, जिलों में रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ने से लोगों को काम के लिए राजधानी की ओर पलायन करने की जरूरत कम पड़ सकती है।

लिवर कैंसर के ये 5 बड़े संकेत! भूलकर भी न करें नजरअंदाज

हेल्थ डेस्क। लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह पाचन, शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने और कई जरूरी रासायनिक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। लिवर कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं देता, लेकिन बीमारी बढ़ने पर शरीर में कुछ ऐसे बदलाव दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

1. बिना वजह तेजी से वजन घटना

अगर बिना डाइटिंग या व्यायाम में बदलाव के वजन लगातार कम हो रहा है, तो इसे सामान्य न समझें। भूख कम लगने के साथ अचानक वजन घटना लिवर कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों से जुड़ा हो सकता है।

2. आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

आंखों की सफेदी या त्वचा का पीला होना पीलिया का संकेत हो सकता है। लिवर कैंसर में खून में बिलीरुबिन बढ़ने पर ऐसा हो सकता है। हालांकि पीलिया के कई दूसरे कारण भी होते हैं, इसलिए लगातार ऐसा होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

3. पेट में लगातार दर्द या सूजन

ऊपरी पेट में लगातार दर्द, पेट में भारीपन या असामान्य सूजन भी लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है। कुछ मामलों में पेट में पानी जमा होने के कारण भी सूजन दिखाई दे सकती है।

4. भूख कम लगना और कमजोरी

लगातार भूख न लगना, थोड़ा खाने पर ही पेट भरने जैसा महसूस होना, कमजोरी और थकान भी लिवर कैंसर के संभावित लक्षणों में शामिल हैं। हालांकि ये लक्षण कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं।

5. मतली, उल्टी या मल के रंग में बदलाव

बार-बार मतली या उल्टी होना और मल का सामान्य से काफी हल्का या मिट्टी जैसा रंग होना भी लिवर की गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकता है। ऐसे लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।

बिहार में इन कर्मचारियों को खुशखबरी, सरकार ने बढ़ाई सैलरी! 1 सितंबर से लागू

पटना। बिहार के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में संविदा पर काम कर रहे चिकित्सकों और शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न पदों के मानदेय में बढ़ोतरी करते हुए नई दरें लागू करने का आदेश जारी किया है। इसका लाभ प्राध्यापक से लेकर जूनियर रेजिडेंट तक को मिलेगा।

किसे कितना मिलेगा मानदेय?

संशोधित व्यवस्था के तहत प्राध्यापक को अब 2.07 लाख रुपये, सह-प्राध्यापक को 1.55 लाख रुपये और सहायक प्राध्यापक को 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। वहीं, सीनियर रेजिडेंट/ट्यूटर का मानदेय 1.15 लाख रुपये और जूनियर रेजिडेंट का 75 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

1 सितंबर से लागू हुई नई दर

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बढ़ा हुआ मानदेय 1 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इस फैसले से चिकित्सा महाविद्यालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और योग्य शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सरकार ला रही नई पेंशन स्कीम! रिटायरमेंट पर पाएं जरूरत के हिसाब से पेंशन

नई दिल्ली। सरकार सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन को लेकर नई व्यवस्था लाने की तैयारी कर रही है। श्रम मंत्रालय के तहत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन स्कीम के जरिए कर्मचारियों को अपनी जरूरत के अनुसार पेंशन और जमा राशि इस्तेमाल करने की अधिक आजादी मिल सकती है। हालांकि, योजना अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम नियम सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होंगे।

जरूरत के समय निकाल सकेंगे ज्यादा पैसा

प्रस्तावित व्यवस्था में रिटायरमेंट के शुरुआती वर्षों में यदि किसी व्यक्ति को इलाज, बच्चों की पढ़ाई या अन्य बड़े खर्च के लिए अधिक पैसों की जरूरत होती है, तो वह अपने पेंशन कोष से अपेक्षाकृत ज्यादा रकम निकाल सकेगा। बची हुई राशि खाते में सुरक्षित रहेगी और उस पर निर्धारित ब्याज मिलने का प्रस्ताव है।

उम्र बढ़ने पर घटा सकेंगे पेंशन की रकम

योजना की खास बात यह बताई जा रही है कि व्यक्ति अपनी आर्थिक जरूरत के अनुसार मासिक निकासी में बदलाव कर सकेगा। उम्र बढ़ने के साथ खर्च कम होने पर पेंशन की राशि घटाई जा सकती है, जिससे खाते में बची रकम लंबे समय तक बनी रह सके।

अभी अंतिम फैसला बाकी

मौजूदा पेंशन व्यवस्थाओं में जहां कुछ राशि निश्चित तरीके से लगानी पड़ती है, वहीं प्रस्तावित योजना में व्यक्ति को अपने जमा कोष पर अधिक नियंत्रण देने की बात कही गई है। कर व्यवस्था को लेकर भी अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। चूंकि योजना अभी प्रारूप स्तर पर है, इसलिए इसके अंतिम नियम और सुविधाएं आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होंगी।

भारत-रूस ने कर दिया खेल, सदमे में US, डॉलर पर निर्भरता हुई कम

नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन से पहले भारत और रूस के रिश्तों को लेकर एक बड़ा आर्थिक बदलाव सामने आया है। दोनों देश आपसी कारोबार में डॉलर की जगह अपनी-अपनी मुद्राओं के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ा रहे हैं। रूस की ओर से भी संकेत दिया गया है कि भारत समेत ब्रिक्स देशों के साथ होने वाले कारोबार में स्थानीय मुद्राओं में भुगतान का हिस्सा काफी बढ़ चुका है।

भारत-रूस के बीच रुपये-रूबल में हो रहा बड़ा कारोबार

भारत और रूस के बीच व्यापार में रुपये और रूबल के जरिए भुगतान की व्यवस्था मजबूत हुई है। रूसी अधिकारियों के मुताबिक दोनों देशों के करीब 96 फीसदी द्विपक्षीय व्यापार का भुगतान स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। इससे हर लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और रूस ने डॉलर को पूरी तरह कारोबार से बाहर कर दिया है। रूस का कहना है कि वह भुगतान के सभी स्वीकार्य तरीकों के लिए खुला है। फिलहाल जोर वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

अतिरिक्त रुपये की समस्या भी सुलझाने की कोशिश

रूस से भारत के आयात, खासकर ऊर्जा खरीद, बढ़ने के कारण वहां भारतीय रुपये का बड़ा भंडार जमा हो गया था। इसके इस्तेमाल को लेकर रूसी कंपनियों के सामने परेशानी थी। अब दोनों देश इस समस्या को दूर करने और स्थानीय मुद्रा में कारोबार को ज्यादा सुविधाजनक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

अमेरिका के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

स्थानीय मुद्राओं में भारत-रूस का बढ़ता कारोबार डॉलर के वैश्विक प्रभाव को तुरंत खत्म नहीं करता। अमेरिकी डॉलर अभी भी दुनिया की प्रमुख आरक्षित मुद्रा है। लेकिन अगर ब्रिक्स के देश आपसी व्यापार में अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाते हैं, तो कुछ क्षेत्रों में डॉलर की जरूरत जरूर कम हो सकती है। यही वजह है कि यह बदलाव आर्थिक के साथ-साथ रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोदी-पुतिन की बैठक पर भी नजर

ब्रिक्स सम्मेलन से पहले 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इसमें व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में स्थानीय मुद्राओं में बढ़ते कारोबार के साथ दोनों देशों की साझेदारी को लेकर दिल्ली में होने वाली यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है।

गुरु के प्रभाव से बदलेंगे 4 राशियों के दिन! कल से मिलेगा धन लाभ और तरक्की का मौका

राशिफल। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह को ज्ञान, धन, शिक्षा, विवाह और सौभाग्य का कारक माना जाता है। गुरु के प्रभाव से कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। कल से गुरु का प्रभाव चार राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। इन जातकों को करियर, कारोबार और आर्थिक मामलों में अच्छे अवसर मिल सकते हैं।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। कारोबार करने वालों को भी लाभ के नए अवसर मिलने की संभावना है।

मिथुन राशि

गुरु का प्रभाव मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से अच्छा साबित हो सकता है। आय के नए साधन बन सकते हैं और लंबे समय से अटका कोई काम पूरा होने की उम्मीद है। निवेश से जुड़े फैसलों में भी लाभ मिल सकता है।

सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिल सकती है। अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। व्यापार में नए सौदे मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं।

धनु राशि

धनु राशि के जातकों के लिए गुरु का प्रभाव विशेष शुभ माना जा रहा है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। परिवार में भी खुशी का माहौल रहेगा और धन से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 3 बड़ी खुशखबरी, घर बनाने के लिए सरकार दे रही लाखों का लोन, जानें पूरी स्कीम

नई दिल्ली। अपना घर बनाने का सपना देखने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सरकार की हाउस बिल्डिंग एडवांस (एचबीए) योजना काफी मददगार साबित हो सकती है। इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों को घर बनाने, खरीदने या मौजूदा मकान की मरम्मत और विस्तार के लिए सरकारी ऋण दिया जाता है।

1. ₹25 लाख तक मिल सकता है अग्रिम

केंद्र सरकार की हाउस बिल्डिंग एडवांस (HBA) योजना के तहत पात्र कर्मचारी नया घर बनाने या खरीदने के लिए मूल वेतन के 34 महीने तक, अधिकतम ₹25 लाख का अग्रिम ले सकते हैं। वास्तविक राशि घर की लागत और कर्मचारी की ऋण चुकाने की क्षमता के आधार पर तय होती है।

2. घर के विस्तार के लिए ₹10 लाख तक

अगर कर्मचारी अपने मौजूदा मकान का विस्तार कराना चाहते हैं, तो इसके लिए 34 महीने के मूल वेतन तक, अधिकतम ₹10 लाख का एचबीए मिल सकता है। योजना के तहत मकान बनाने के साथ कुछ अन्य आवास संबंधी जरूरतों के लिए भी अग्रिम का प्रावधान है।

3. 5 साल की सेवा वालों को भी पात्रता

आधिकारिक जानकारी के अनुसार स्थायी केंद्रीय कर्मचारी और कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी करने वाले अन्य पात्र कर्मचारी एचबीए का लाभ ले सकते हैं। दोनों पति-पत्नी केंद्रीय कर्मचारी हैं तो नियमों के तहत दोनों को संयुक्त या अलग-अलग एचबीए मिल सकता है।

कौन ले सकता है लाभ?

योजना का लाभ पात्र केंद्रीय सरकारी कर्मचारी निर्धारित शर्तों के तहत उठा सकते हैं। सेवा अवधि, पहले से सरकारी आवास सुविधा का लाभ लेने और अन्य नियमों के आधार पर पात्रता तय होती है। पति-पत्नी दोनों केंद्रीय कर्मचारी होने की स्थिति में भी योजना के अलग नियम लागू होते हैं। एचबीए योजना केंद्रीय कर्मचारियों के लिए घर बनाने या खरीदने की जरूरत को आसान बनाने वाली सरकारी सुविधा है। आवेदन से पहले मौजूदा नियमों और पात्रता की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।

यूपी के राशन कार्ड धारकों के लिए खुशखबरी! इस तारीख से मिलेगा फ्री राशन, चीनी भी!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राशन कार्ड धारकों के लिए सितंबर महीने में राहत भरी खबर है। सरकारी राशन वितरण की तारीख सामने आ गई है। इस बार पात्र लोगों को मुफ्त अनाज के साथ अंत्योदय कार्ड धारकों को चीनी भी दी जाएगी। राशन लेने के लिए लाभार्थियों को निर्धारित तारीख के भीतर अपनी उचित दर की दुकान पर पहुंचना होगा।

10 से 25 सितंबर तक मिलेगा राशन

सितंबर महीने का राशन वितरण 10 सितंबर 2026 से शुरू होकर 25 सितंबर तक चलेगा। राशन दुकानों पर वितरण दो पालियों में किया जाएगा। पहली पाली सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगी।

अंत्योदय कार्ड वालों को 35 किलो

आपको बता दें की अंत्योदय अन्न योजना के लाभार्थियों को कुल 35 किलो अनाज दिया जाएगा। इसमें 14 किलो गेहूं और 21 किलो चावल शामिल हैं। इसके अलावा अंत्योदय कार्ड धारकों को 3 किलो चीनी भी निर्धारित दर पर उपलब्ध कराई जाएगी।

चीनी के लिए जरूरी है यह बात

राशन लेते समय कार्ड धारकों को एक जरूरी बात का ध्यान रखना होगा। सामान्य राशन के लिए पोर्टेबिलिटी की सुविधा उपलब्ध हो सकती है, लेकिन चीनी के मामले में पोर्टेबिलिटी लागू नहीं होगी। यानी अंत्योदय कार्ड धारकों को चीनी अपनी उसी मूल राशन दुकान से लेनी होगी, जहां उनका कार्ड पंजीकृत है।

गरीब परिवारों को मिलता है लाभ

अंत्योदय अन्न योजना का लाभ आर्थिक रूप से सबसे कमजोर परिवारों को दिया जाता है। योजना के तहत पात्र अंत्योदय कार्ड धारकों को हर महीने निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। सितंबर के वितरण में चीनी मिलने से त्योहारों के मौसम में इन परिवारों को अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।

यूपी की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी! मानदेय में 4 हजार रुपये की बढ़ोतरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने मानदेय बढ़ाने को लेकर आदेश जारी कर दिया है। 

नई व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 4,000 रुपये प्रति माह, जबकि सहायिकाओं के मानदेय में 2,000 रुपये प्रति माह की वृद्धि होगी। नई बढ़ी हुई राशि सितंबर के मानदेय में जुड़ेगी और इसका भुगतान अक्टूबर में किया जाएगा।

राज्यांश में बढ़ोतरी से मिलेगा लाभ

विभागीय आदेश के अनुसार कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी दो हिस्सों में की गई है। इसमें 1,500 रुपये का निश्चित मानदेय और 2,500 रुपये का प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन शामिल है। इस तरह राज्यांश में कुल 4,000 रुपये की अतिरिक्त राशि जुड़ेगी। वहीं आंगनबाड़ी सहायिकाओं के लिए 750 रुपये निश्चित मानदेय और 1,250 रुपये प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के रूप में बढ़ाए गए हैं। दोनों को मिलाकर सहायिकाओं के राज्यांश में 2,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि होगी।

2.91 लाख कर्मियों को मिलेगा फायदा

प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सहायिकाएं काम कर रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 3.28 लाख पद स्वीकृत हैं। इनमें फिलहाल करीब 2.91 लाख कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं। इनमें लगभग 1.62 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और 1.39 लाख सहायिकाएं शामिल हैं।

अक्टूबर में खाते में आएगी बढ़ी राशि

नई बढ़ोतरी सितंबर 2026 के मानदेय से प्रभावी मानी जाएगी। हालांकि इसका भुगतान अक्टूबर में किया जाएगा। यानी सितंबर के मानदेय में बढ़ी हुई राशि को शामिल करके अगले महीने भुगतान किया जाएगा। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आने वाले महीने से बढ़े हुए मानदेय का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

सरकार पहले भी कर चुकी है बढ़ोतरी

योगी सरकार अपने पहले कार्यकाल में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी कर चुकी है। इस बार की वृद्धि के बाद वर्ष 2017 की तुलना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में कुल 9,000 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 4,500 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। सरकार का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाने के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की सुविधाओं और आर्थिक स्थिति में सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

10 से 20 सितंबर तक शुभ संयोग! 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन-समृद्धि के खुलेंगे रास्ते

राशिफल। सितंबर का मध्य भाग ज्योतिष के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। 10 से 20 सितंबर 2026 के बीच कई ग्रहों की स्थिति में बदलाव देखने को मिलेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दौरान बुध कन्या राशि में रहेंगे, जबकि 18 सितंबर को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इन ग्रह स्थितियों का असर अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है।

इस अवधि को खास तौर पर मेष, वृषभ, कर्क, वृश्चिक और मकर राशि के जातकों के लिए अनुकूल माना जा सकता है। इन राशियों को करियर, कारोबार, आर्थिक मामलों और रुके हुए कामों में सकारात्मक परिणाम मिलने के योग बन सकते हैं।

1. मेष राशि

10 से 20 सितंबर के बीच मेष राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में सुधार के संकेत हैं। नौकरी करने वालों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए संपर्कों से फायदा होने की संभावना है। अटके हुए कामों में भी गति आ सकती है। किसी पुराने निवेश या संपत्ति से लाभ मिलने के योग बन सकते हैं।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और धन के लिहाज से अच्छा रह सकता है। नौकरी में बदलाव की कोशिश कर रहे लोगों को कोई अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापारियों के लिए नए सौदे या कारोबार बढ़ाने के अवसर सामने आ सकते हैं। परिवार में भी सुख-शांति का माहौल रहने की उम्मीद है। हालांकि बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेना बेहतर रहेगा।

3. कर्क राशि

18 सितंबर को मंगल के कर्क राशि में प्रवेश को इस अवधि की महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इसका असर कर्क राशि वालों के आत्मविश्वास और कामकाज पर पड़ सकता है। कारोबार में लाभ के नए रास्ते खुल सकते हैं और लंबे समय से अटका पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। मेहनत करने वालों को अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है।

4. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए 10 से 20 सितंबर का समय आर्थिक दृष्टि से लाभदायक हो सकता है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार में नया समझौता या महत्वपूर्ण सौदा फायदा दे सकता है। परिवार और सामाजिक जीवन में भी मान-सम्मान बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं।

5. मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए यह समय योजनाओं को आगे बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नौकरी में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ पद और प्रतिष्ठा में सुधार के अवसर मिल सकते हैं। धन से जुड़े मामलों में स्थिति मजबूत होने की संभावना है। निवेश करने की सोच रहे लोगों को जल्दबाजी से बचते हुए पूरी जानकारी के बाद निर्णय लेना चाहिए। मेहनत और अनुशासन से अच्छे परिणाम हासिल हो सकते हैं।

यूपी में छात्राओं के लिए खुशखबरी, सरकार देगी फ्री स्कूटी, तैयारी शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की मेधावी छात्राओं के लिए योगी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत प्रदेश की करीब 50 हजार छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया है कि स्कूटी का वितरण अक्टूबर-नवंबर 2026 में किया जाएगा।

स्नातक की मेधावी छात्राओं को मिलेगा लाभ

योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली मेधावी छात्राओं का चयन किया जाएगा। उपलब्ध दिशा-निर्देशों के अनुसार संबंधित संस्थानों की शीर्ष 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर योजना में शामिल किया जाएगा। राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध डिग्री कॉलेजों की पात्र छात्राएं इसका लाभ ले सकेंगी।

स्कूटी के साथ छात्राओं को ये सुविधाएं भी

सरकार की ओर से चयनित छात्राओं को केवल स्कूटी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि वाहन से जुड़े शुरुआती खर्च का भी ध्यान रखा जाएगा। योजना के तहत पंजीकरण, बीमा, हेलमेट और पेट्रोल जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। इससे छात्राओं और उनके परिवारों पर स्कूटी खरीदने का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।

पढ़ाई और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा

सरकार का उद्देश्य छात्राओं के लिए कॉलेज तक आने-जाने की सुविधा आसान करना और उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ाना है। निजी वाहन मिलने से दूर-दराज से पढ़ाई करने वाली छात्राओं को आवागमन में सहूलियत होगी। साथ ही इससे छात्राओं को आगे की पढ़ाई और रोजगार के अवसरों तक आसानी से पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

सरकार ने किया 400 करोड़ रुपये का प्रावधान

रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के बजट में 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है। अब पात्र छात्राओं की पहचान और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया के बाद वितरण की तैयारी की जा रही है।

चयन प्रक्रिया में इन छात्राओं को विशेष राहत

योजना से जुड़े दिशा-निर्देशों में मेधावी छात्राओं के साथ कुछ विशेष वर्गों को भी राहत देने का प्रावधान बताया गया है। इनमें दिव्यांग, निराश्रित और शहीद परिवारों की बेटियां शामिल हैं। हालांकि पात्रता और मेरिट से जुड़ी शर्तों का अंतिम निर्धारण संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही होगा।

यूपी स्वास्थ्य विभाग का फैसला, डॉक्टरों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी डॉक्टरों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर करने के लिए सेवानिवृत्ति के बाद भी अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं लेने की तैयारी में है। इसके तहत 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों को अगले पांच साल तक पुनर्नियुक्ति दी जाएगी। यानी पात्र डॉक्टर 70 वर्ष की उम्र तक सरकारी अस्पतालों में सेवाएं दे सकेंगे। इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है।

पांच साल तक जारी रह सकेगी सेवा

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होने के बाद अनुभवी चिकित्सकों की सेवाओं का इस्तेमाल दोबारा किया जा सकेगा। इससे अस्पतालों को लंबे अनुभव वाले डॉक्टर मिलेंगे और मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ मिलता रहेगा। सरकार का उद्देश्य खासतौर पर उन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी कम करना है, जहां चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली हैं।

सीएचसी और पीएचसी को भी मिलेगा लाभ

इस फैसले का असर सिर्फ बड़े सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले विभागों को इससे विशेष राहत मिल सकती है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को इलाज और चिकित्सकीय सलाह के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अनुभव का सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा 

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर विभाग इस व्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग में चिकित्सा अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी संभालते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी योग्य चिकित्सकों को सेवा का अवसर मिलने से उनके वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ मरीजों को मिल सकेगा।

विभाग द्वारा आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं जारी रखने से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिकित्सकों की कमी का दबाव कम होगा और अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

11 सितंबर को मोदी-पुतिन की बड़ी बैठक, दुनिया की नजरें टिकीं

नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले भारत और रूस के बीच अहम द्विपक्षीय बातचीत होने जा रही है। 11 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात प्रस्तावित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रक्षा सहयोग पर रहेगी खास नजर

रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान सैन्य सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत की उम्मीद है। क्रेमलिन की ओर से संकेत दिया गया है कि भारत को रूस के अत्याधुनिक एसयू-57 लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का मुद्दा भी चर्चा के एजेंडे में शामिल हो सकता है।

ब्रह्मोस सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर

भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी लंबे समय से मजबूत रही है। दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। अब इस सहयोग को और आगे बढ़ाने, मिसाइलों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को होना है। ऐसे में उससे पहले मोदी-पुतिन की यह बैठक दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।

यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों को खुशखबरी! बीमारी में मिलेगी 78 दिन की पेड लीव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के जरिए काम करने वाले कार्मिकों को अब बीमारी और गंभीर रोग की स्थिति में कर्मचारी राज्य बीमा निगम की सुविधाओं का लाभ मिलेगा। इसके तहत पात्र कर्मचारियों को 78 दिनों तक सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा।

महिलाओं को 180 दिन का मातृत्व अवकाश

महिला आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भी बड़ी सुविधा दी गई है। उन्हें 26 सप्ताह यानी 180 दिनों का सवैतनिक मातृत्व अवकाश मिलेगा। यह लाभ अधिकतम दो बच्चों के जन्म तक दिए जाने का प्रावधान है।

परिवार को भी इलाज की सुविधा

व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के आश्रित परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सीय सुविधाएं मिल सकेंगी। जरूरत पड़ने पर ईएसआईसी अस्पतालों और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में इलाज, सर्जरी और विशेष जांच जैसी सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।

मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए 15 हजार रुपये

किसी आउटसोर्स कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए परिवार को 15 हजार रुपये की सहायता देने का प्रावधान है। वहीं, ईपीएफ के तहत 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा, जो न्यूनतम 1000 रुपये से अधिकतम 7500 रुपये तक हो सकती है।

सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय का समय पर भुगतान, ईपीएफ-ईएसआईसी की राशि जमा कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इससे प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों को रोजगार के साथ सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।

रोज सुबह नींबू पानी पीने के 5 बड़े फायदे, पेट से लेकर त्वचा तक दिखेगा जबरदस्त असर

हेल्थ डेस्क। सुबह की शुरुआत अगर एक गिलास नींबू पानी से की जाए तो यह शरीर को तरोताजा रखने में मदद कर सकता है। नींबू में विटामिन-सी और कुछ जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या वजन घटाने का जादुई उपाय नहीं माना जाना चाहिए। आइए जानते हैं इसके 5 बड़े फायदे।

1. पाचन में मिल सकती है मदद

नींबू पानी शरीर में पर्याप्त मात्रा में तरल पहुंचाने में मदद करता है। सुबह इसे पीने से कुछ लोगों को पाचन बेहतर रखने और पेट साफ होने में सहायता मिल सकती है।

2. शरीर में पानी की कमी दूर 

रातभर सोने के बाद शरीर को पानी की जरूरत होती है। नींबू मिलाकर पानी पीने से दिन की शुरुआत हाइड्रेशन के साथ की जा सकती है।

3. विटामिन-सी का अच्छा स्रोत

नींबू में विटामिन-सी मौजूद होता है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

4. त्वचा के लिए फायदेमंद

पर्याप्त पानी पीना त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। नींबू में मौजूद विटामिन-सी शरीर में कोलेजन बनाने की प्रक्रिया में भी योगदान देता है, जो त्वचा के लिए जरूरी है।

5. ताजगी और ऊर्जा का एहसास

सुबह नींबू पानी पीना कई लोगों को दिन की शुरुआत में तरोताजा महसूस करा सकता है। खासकर गर्म मौसम में यह शरीर में पानी की जरूरत पूरी करने का आसान विकल्प हो सकता है।

यूपी की महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी! 6 बड़ी योजनाएं बदलेंगी जिंदगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं और बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं के जरिए पढ़ाई, पेंशन, विवाह, सुरक्षा, रोजगार और यात्रा जैसी सुविधाओं में मदद दी जा रही है। आइए जानते हैं महिलाओं के लिए चल रही 6 प्रमुख योजनाओं के बारे में।

1. मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना

बेटियों की शिक्षा और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस योजना में पात्र बालिकाओं को अलग-अलग चरणों में कुल 15 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका लाभ जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक निर्धारित चरणों में मिलता है।

2. रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना

उच्च शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत पात्र मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का प्रावधान है।

3. निराश्रित महिला पेंशन योजना

विधवा और बेसहारा महिलाओं के लिए यह योजना आर्थिक सहारा देती है। पात्र महिलाओं को हर तीन महीने में 3 हजार रुपये की पेंशन दिए जाने का प्रावधान है।

4. रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष

हिंसा की गंभीर घटनाओं से प्रभावित महिलाओं और बच्चों को इलाज, सहायता और पुनर्वास के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाती है। इसमें तेजाब हमले जैसी घटनाओं से पीड़ित लोगों को भी सहायता मिल सकती है।

5. मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना

आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सरकार मदद करती है। पात्र परिवारों के साथ विधवा महिलाओं की बेटियों को भी इस योजना का लाभ दिया जाता है।

6. स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी

महिलाओं को रोजगार और छोटे कारोबार से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर दिए जाते हैं।

इसके अलावा 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए उत्तर प्रदेश रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा भी उपलब्ध है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना है।

यूपी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को खुशखबरी, मानदेय में 50% तक बढ़ोतरी की तैयारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार उनके मानदेय में 50 फीसदी तक बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही इस संबंध में बड़ा ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, बढ़ा हुआ मानदेय कितना होगा और कब से लागू होगा, इसकी तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।

1.5 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को मिल सकता है लाभ

प्रस्ताव लागू होने पर प्रदेश की 1.5 लाख से ज्यादा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहीं कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला आर्थिक राहत देने वाला हो सकता है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई अहम कार्य करती हैं। ऐसे में मानदेय बढ़ाने की संभावित पहल को उनके आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

महिलाओं को 50 हजार रुपये तक मदद देने पर भी चर्चा

इसके अलावा राज्य सरकार महिलाओं को 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है। इसके लिए पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे राशि भेजने या शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं के जरिए लाभ देने जैसे विकल्पों पर चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में भी अंतिम फैसला सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

केंद्र सरकार की जबरदस्त योजना, बेटियों के लिए 1 बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। बेटियों के बेहतर भविष्य, पढ़ाई और शादी जैसे खर्चों के लिए सुकन्या समृद्धि योजना माता-पिता के बीच काफी लोकप्रिय है। सरकार की इस बचत योजना में छोटी रकम से लंबे समय में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। यह योजना बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत शुरू की गई थी।

हर महीने ₹1500 जमा करने का हिसाब

अगर माता-पिता बेटी के नाम इस योजना में हर महीने 1500 रुपये जमा करते हैं तो सालाना निवेश 18 हजार रुपये होगा। 15 साल तक लगातार रकम जमा करने पर कुल निवेश 2.70 लाख रुपये होगा। मौजूदा 8.2 प्रतिशत ब्याज दर को आधार मानें तो दी गई गणना के मुताबिक 21 साल की अवधि पूरी होने पर रकम करीब 8.31 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। इसमें करीब 5.61 लाख रुपये ब्याज से मिलने का अनुमान है। हालांकि, ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है, इसलिए वास्तविक परिपक्वता राशि बदल सकती है।

15 साल तक ही करना होता है निवेश

इस योजना में खाता खुलने के बाद 15 साल तक रकम जमा करनी होती है, जबकि खाता 21 साल में परिपक्व होता है। यानी 15 साल तक निवेश के बाद बाकी अवधि में जमा रकम पर ब्याज जुड़ता रहता है। अगर निवेशक वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही सालाना रकम जमा करता है तो ब्याज की गणना के कारण मिलने वाली अंतिम राशि मासिक जमा की तुलना में अलग हो सकती है।

टैक्स में भी मिलती है राहत

सुकन्या समृद्धि योजना की एक खासियत इसका कर लाभ है। पात्र निवेश पर आयकर कानून के तहत धारा 80सी में निर्धारित सीमा तक कटौती का लाभ मिल सकता है। योजना के नियमों के अनुसार ब्याज और परिपक्वता राशि पर भी कर संबंधी लाभ मिलता है। योजना की ब्याज दर और नियम समय-समय पर सरकार द्वारा बदले जा सकते हैं। इसलिए खाता खोलने या निवेश करने से पहले मौजूदा नियमों की जानकारी आधिकारिक स्रोत से जरूर जांच लें।

कच्चा नारियल सेहत के लिए है बेहद फायदेमंद, रोज खाने से मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

हेल्थ डेस्क। कच्चा नारियल सिर्फ स्वाद में ही अच्छा नहीं होता, बल्कि पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है। इसमें स्वस्थ वसा, फाइबर, खनिज और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। सीमित मात्रा में कच्चा नारियल आहार में शामिल करने से शरीर को कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।

1. पाचन को रखता है बेहतर

कच्चे नारियल में अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है। यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाए रखने और मल त्याग को आसान करने में मदद कर सकता है। कब्ज की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी फाइबर युक्त आहार फायदेमंद माना जाता है।

2. शरीर को मिलती है ऊर्जा

नारियल में मौजूद वसा शरीर को ऊर्जा देने में मदद करती है। दिनभर काम करने वाले लोगों के लिए सीमित मात्रा में कच्चा नारियल भोजन का पौष्टिक हिस्सा बन सकता है।

3. दिल की सेहत के लिए उपयोगी

कच्चे नारियल में मौजूद वसा को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती हैं। इसमें संतृप्त वसा भी काफी होती है, इसलिए इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए। संतुलित आहार के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है।

4. हड्डियों और मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

नारियल में मैंगनीज, तांबा और अन्य खनिज पाए जाते हैं, जो शरीर के सामान्य चयापचय और हड्डियों के स्वास्थ्य में भूमिका निभाते हैं। संतुलित आहार के साथ इसका सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

5. पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद

कच्चे नारियल में फाइबर और वसा दोनों होते हैं, इसलिए इसे खाने के बाद कुछ समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। इससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला, जमीन मालिकों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में जमीन के मालिकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब उनकी जमीन के रिकॉर्ड में होने वाली महत्वपूर्ण कार्रवाई की जानकारी मोबाइल पर संदेश के जरिए मिल सकेगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बिहार भूमि पोर्टल पर संदेश अलर्ट की सुविधा शुरू की है।

जमाबंदी से मोबाइल नंबर जोड़ना होगा

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए भू-धारी अपनी जमाबंदी या संबंधित भूखंड के रिकॉर्ड से मोबाइल नंबर जोड़ सकते हैं। मोबाइल नंबर का सत्यापन एक बार मिलने वाले पासवर्ड के जरिए किया जाएगा। सत्यापन पूरा होते ही संदेश अलर्ट की सुविधा सक्रिय हो जाएगी।

दाखिल-खारिज की भी मिलेगी जानकारी

जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर उसके पूरा होने तक की जानकारी भू-धारी को मोबाइल पर मिल सकेगी। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड में सुधार से जुड़ी प्रक्रिया शुरू होने और उसके निपटारे की सूचना भी संदेश के माध्यम से दी जाएगी। इससे जमीन मालिकों को अपने रिकॉर्ड में होने वाली गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सकेगी और किसी अनधिकृत बदलाव की स्थिति में वे जल्द कार्रवाई कर सकेंगे।

पोर्टल पर ऐसे जोड़ें मोबाइल नंबर

भू-धारी बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर अपनी जमाबंदी या संबंधित भूखंड का चयन कर मोबाइल नंबर दर्ज कर सकते हैं। इसके बाद मोबाइल पर प्राप्त सत्यापन कोड डालना होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित जमीन के रिकॉर्ड से संदेश सेवा जुड़ जाएगी।

विभाग की ओर से राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से भी भू-धारियों के मोबाइल नंबर दर्ज कराने का काम किया जा रहा है। नई व्यवस्था से जमीन के रिकॉर्ड की निगरानी आसान होने के साथ ही राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

रेलवे में 560 पदों पर भर्ती, युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, नौकरी पाने का आया शानदार मौका

नई दिल्ली। रेलवे में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड ने पैरामेडिकल श्रेणी के 560 पदों पर भर्ती के लिए संक्षिप्त सूचना जारी की है। इस भर्ती के जरिए अलग-अलग पैरामेडिकल पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

15 सितंबर से शुरू होगा आवेदन

रेलवे पैरामेडिकल भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 से शुरू होने की संभावित है। इच्छुक अभ्यर्थी 14 अक्टूबर 2026 रात 11:59 बजे तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।

यह भर्ती केंद्रीय रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से जारी अधिसूचना के तहत होगी। भर्ती के लिए जारी सूचना में कुल 560 पदों की संख्या फिलहाल संभावित बताई गई है। पदों की अंतिम संख्या विस्तृत विज्ञापन जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।

वेतन भी आकर्षक

पैरामेडिकल श्रेणी के अलग-अलग पदों के अनुसार वेतनमान सातवें वेतन आयोग के तहत स्तर 3 से स्तर 7 तक निर्धारित किया जाएगा। यानी चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार अच्छा वेतन और रेलवे की नौकरी से जुड़ी अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं।

आवेदन से पहले जरूरी बात

अभ्यर्थियों को सलाह है कि आवेदन शुरू होने से पहले संबंधित पद की शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आवेदन शुल्क और चयन प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी आधिकारिक विज्ञापन में जरूर देख लें। गलत जानकारी के साथ आवेदन करने से बचें।

यूपी में बनेंगे 24 नए पुल, इन 2 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

न्यूज डेस्क। उत्तर प्रदेश के देवरिया और गोरखपुर जिले के ग्रामीण इलाकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। गांवों में आवागमन बेहतर करने और बरसात के दौरान जलनिकासी की समस्या दूर करने के लिए शासन ने 24 नए लघु सेतुओं के निर्माण को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब 29 करोड़ 77 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।

काम शुरू कराने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में पहली किस्त के तौर पर करीब 5 करोड़ 95 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं। लोक निर्माण विभाग पुराने और जर्जर पुल-पुलियों की जगह नए लघु सेतु, आरसीसी पुलिया और बाक्स कल्वर्ट तैयार करेगा।

देवरिया में 10 स्थानों पर होगा निर्माण

देवरिया जिले में 10 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इनकी कुल लागत करीब 13 करोड़ 73 लाख रुपये है। अलग-अलग संपर्क मार्गों पर क्षतिग्रस्त पुलिया और पुलों को हटाकर नए निर्माण किए जाएंगे। जमुआर नाले, बरसाती नालों और अन्य जलधाराओं पर पुल व बाक्स कल्वर्ट बनाए जाने हैं।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और बारिश के दौरान रास्तों पर पानी भरने की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।

गोरखपुर में 14 परियोजनाओं को मंजूरी

गोरखपुर में 14 स्थानों पर नए लघु सेतु, आरसीसी पुलिया और बाक्स कल्वर्ट बनाए जाएंगे। अलग-अलग संपर्क मार्गों को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं से कई ग्रामीण इलाकों में आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। 

सरकार की इस पहल से जर्जर पुल-पुलियों पर निर्भर ग्रामीणों को राहत मिलेगी। नए निर्माण पूरे होने के बाद गांवों से मुख्य मार्गों तक पहुंच आसान होगी और बरसात के मौसम में भी संपर्क बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

यूपी सरकार की सौगात, गांव-गांव को खुशखबरी, मिलेगी कई सुविधाएं

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के लिए अब बेहतर सुविधा मिलने वाली है। पंचायती राज विभाग की ओर से प्रदेश की 71 विधानसभा क्षेत्रों में पंचायत उत्सव भवन तैयार कराए जा रहे हैं। इन भवनों का निर्माण शुरू हो चुका है और इन्हें जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एक ही जगह मिलेंगी कई सुविधाएं

उत्सव भवन तैयार होने के बाद ग्रामीणों को शादी, धार्मिक आयोजन और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए व्यवस्थित जगह मिल सकेगी। भवन में करीब 100 लोगों की क्षमता वाला सभागार, मंच या मंडप, तीन कमरे और रसोईघर की सुविधा होगी। इसके अलावा पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग शौचालय भी बनाए जाएंगे। दिव्यांगजनों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। भवन में उनके लिए अलग शौचालय और सुविधानुसार कमरा उपलब्ध कराया जाएगा।

करीब 3000 वर्गमीटर पर निर्माण

प्रत्येक उत्सव भवन के लिए करीब 3000 वर्गमीटर भूमि का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें लगभग 520 वर्गमीटर क्षेत्र में मुख्य भवन बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मांगलिक कार्यक्रमों के लिए सुविधाजनक और उचित स्थान उपलब्ध कराना है।

किराया मनमाना नहीं होगा

इन भवनों के इस्तेमाल के लिए ग्रामीणों से मनमाना शुल्क नहीं लिया जाएगा। कार्यक्रमों के लिए आवंटन की दर जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति तय करेगी। विभाग के अनुसार दरें कम रखने पर जोर दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार इसका लाभ उठा सकें।

आगे भी बढ़ेगा योजना का दायरा

पहले चरण में 71 विधानसभा क्षेत्रों में काम शुरू किया गया है। इसके बाद वर्ष 2026-27 के बजट में 71 और उत्सव भवनों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, अनुपूरक बजट में 78 अन्य उत्सव भवनों के लिए 109 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निर्माण पूरा होने के बाद इन भवनों का संचालन ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा। इससे गांवों में होने वाले सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

शनि-बुध का समसप्तक योग, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के रास्ते

राशिफल। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों की चाल में बदलाव का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ता है। 7 सितंबर 2026 से शनि और बुध के बीच समसप्तक योग बन रहा है, जिसका प्रभाव 26 सितंबर तक रहेगा। इस दौरान बुध अपनी उच्च राशि कन्या में स्थित हैं, जबकि शनि मीन राशि में हैं। दोनों ग्रह एक-दूसरे से सातवें स्थान पर होने के कारण समसप्तक स्थिति बना रहे हैं।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार और गणना के कारक माने जाते हैं, जबकि शनि कर्म, अनुशासन और मेहनत से जुड़े ग्रह हैं। ऐसे में इस योग का असर कुछ राशि वालों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से सकारात्मक रह सकता है।

वृष राशि

वृष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक मामलों में राहत देने वाला हो सकता है। नौकरी करने वालों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ के नए रास्ते मिल सकते हैं। लंबे समय से अटके किसी काम में गति आने की संभावना है।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए बुध का प्रभाव विशेष माना जाता है। इस अवधि में उनकी कार्यक्षमता और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है। नौकरी में तरक्की के अवसर मिल सकते हैं और व्यापार करने वालों को नए संपर्कों से फायदा हो सकता है। आर्थिक स्थिति में भी सुधार के संकेत हैं।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों के लिए यह योग काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि बुध इस राशि में उच्च स्थिति में हैं। नौकरी और व्यवसाय में नए अवसर सामने आ सकते हैं। आय बढ़ाने के प्रयास सफल हो सकते हैं। किसी महत्वपूर्ण योजना को आगे बढ़ाने में भी सफलता मिलने की संभावना है।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को भी इस योग से लाभ मिलने की उम्मीद है। कार्यक्षेत्र में मेहनत का बेहतर परिणाम मिल सकता है। कारोबार में नए सौदे या अवसर सामने आ सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास सफल हो सकते हैं। पुराने निवेश से भी लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

केंद्र सरकार का तोहफा, यूपी के ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण परिवारों और उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के बीच एलपीजी सिलिंडर बुकिंग के अंतर को खत्म कर दिया है। अब गांवों में रहने वाले उपभोक्ता भी महज 25 दिन बाद दूसरा रसोई गैस सिलिंडर बुक करा सकेंगे। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में दूसरे सिलिंडर के लिए 45 दिन का इंतजार करना पड़ता था।

सभी प्रमुख गैस कंपनियों पर लागू होगा नियम

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका असर इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम समेत प्रमुख गैस कंपनियों के उपभोक्ताओं पर होगा। कंपनियों को व्यवस्था को जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

बड़े परिवारों को सबसे ज्यादा राहत

ग्रामीण इलाकों में संयुक्त और बड़े परिवारों में गैस की खपत अधिक होती है। ऐसे में 45 दिनों की बुकिंग सीमा के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब 25 दिन में दोबारा सिलिंडर मिलने की सुविधा से उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

उज्ज्वला लाभार्थियों को भी फायदा

उत्तर प्रदेश उज्ज्वला योजना के बड़े लाभार्थी राज्यों में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में सिलिंडर की उपलब्धता आसान होने से खासतौर पर उज्ज्वला उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है। इससे रसोई गैस की जरूरत पूरी करने के लिए लकड़ी या अन्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिलेगी।

यह बदलाव उस समय किया गया है जब सरकार की ओर से घरेलू गैस की आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने की व्यवस्था और बेहतर होने की उम्मीद है।

यूपी सरकार का फैसला, बुनकरों के लिए 5 बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की पहचान उसकी कला और संस्कृति से भी होती है। बनारस की रेशमी साड़ियों से लेकर भदोही के कालीन तक यहां के बुनकर अपनी मेहनत और हुनर से देश-दुनिया में पहचान बना चुके हैं। हालांकि, महंगा धागा, बढ़ती बिजली लागत और बाजार में बिचौलियों की वजह से कई बुनकर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना उनके लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

पांच साल में बनेंगे 150 हथकरघा क्लस्टर

योजना के तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश में 150 हथकरघा क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 50 हजार से अधिक बुनकरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। कम से कम 25 बुनकरों के समूह को फर्म के रूप में पंजीकृत कराकर उन्हें संगठित तरीके से सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

बुनकरों को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

1. सौर ऊर्जा वाले करघे पर सब्सिडी: बिजली का खर्च घटाने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले करघों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन पर अधिकतम 80 प्रतिशत तक सहायता मिलने की बात कही गई है।

2. सस्ता धागा और कच्चा माल: धागे की बढ़ती कीमत से राहत देने के लिए धागा बैंक जैसी व्यवस्था के जरिए बुनकरों को उचित दर पर कच्चा माल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।

3. सीधे बाजार तक पहुंच: बुनकरों को ऑनलाइन बाजार और सरकारी खरीद मंचों से जोड़ने पर जोर है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उत्पाद बेचने का बेहतर अवसर मिलेगा।

4. आसान ऋण की सुविधा: करघा लगाने या कारोबार बढ़ाने के लिए बुनकरों को ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें अपना काम विस्तार देने में मदद मिलेगी।

5. आधुनिक डिजाइन की ट्रेनिंग: बदलते बाजार के अनुसार नए डिजाइन और आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए बुनकरों और नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने की योजना है।

गांव से देश-दुनिया तक पहुंचेगा सामान

योजना का एक अहम उद्देश्य बुनकरों के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है। ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से गांव में तैयार कपड़े और हस्तकरघा उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशी बाजारों तक भी पहुंच सकेंगे। इससे बुनकरों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।