इन 8 जिलों को मिलेगा फायदा
प्रस्तावित रूट के अनुसार एक्सप्रेसवे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से होकर गुजरेगा। पश्चिम चंपारण से बिहार में प्रवेश करने के बाद इसका रूट किशनगंज तक जाएगा और फिर पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ेगा।
इस दौरान कई ग्रामीण और कस्बाई इलाकों को एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है। इससे लोगों के आवागमन के साथ माल ढुलाई भी आसान हो सकती है।
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब 37,465 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखे जाने की बात कही जा रही है। इसके बनने के बाद लंबी दूरी के सफर में समय की काफी बचत हो सकती है।
कारोबार और रोजगार को बढ़ावा
यह एक्सप्रेसवे सिर्फ यात्रा को आसान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, उद्योग, होटल और स्थानीय कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है। खासकर उत्तर बिहार और सीमांचल के जिलों के लिए यह सड़क परियोजना आर्थिक गतिविधियों का नया रास्ता खोल सकती है।

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