रक्षा सहयोग पर रहेगी खास नजर
रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान सैन्य सहयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत की उम्मीद है। क्रेमलिन की ओर से संकेत दिया गया है कि भारत को रूस के अत्याधुनिक एसयू-57 लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का मुद्दा भी चर्चा के एजेंडे में शामिल हो सकता है।
ब्रह्मोस सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर
भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी लंबे समय से मजबूत रही है। दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइल के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। अब इस सहयोग को और आगे बढ़ाने, मिसाइलों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हो सकती है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को होना है। ऐसे में उससे पहले मोदी-पुतिन की यह बैठक दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।

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