7000 रुपये की सीमा से क्या है मामला?
मौजूदा व्यवस्था में पात्र कर्मचारियों के बोनस की गणना अधिकतम 7000 रुपये की सीमा को आधार मानकर की जाती है। यानी किसी कर्मचारी की वास्तविक बेसिक सैलरी 18,000 रुपये या इससे अधिक होने पर भी बोनस की गणना 7000 रुपये के आधार पर ही होती है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इस सीमा को बढ़ाकर मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे के अनुरूप किया जाए।
अगर गणना का आधार 18,000 रुपये किया जाता है, तो 30 दिन के बोनस की रकम करीब 17,763 रुपये तक पहुंच सकती है। इससे कर्मचारियों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में काफी अधिक फायदा मिलने की संभावना होगी।
8वें वेतन आयोग से भी जुड़ी नजर
कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर भी है। अगर आयोग के बाद न्यूनतम बेसिक पे में बढ़ोतरी होती है और बोनस की गणना के लिए नई बेसिक सैलरी को आधार बनाया जाता है, तो भविष्य में बोनस की रकम भी बढ़ सकती है। हालांकि, अभी 8वें वेतन आयोग के बाद बेसिक पे और बोनस की नई गणना को लेकर कोई अंतिम आंकड़ा तय नहीं हुआ है।
रेलवे कर्मचारियों को भी हो सकता है फायदा
बोनस की गणना में बदलाव का असर रेलवे समेत कई विभागों के पात्र कर्मचारियों पर पड़ सकता है। रेलवे के पात्र अराजपत्रित कर्मचारियों को 78 दिनों का प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस मिलता है। ऐसे में अगर बोनस की मौजूदा सीमा में बदलाव किया जाता है, तो उनकी मिलने वाली राशि में भी बड़ा अंतर आ सकता है।
फिलहाल बोनस की सीमा बदलने का फैसला सरकार के स्तर पर होना बाकी है। ऐसे में कर्मचारियों को इस दिवाली बोनस के ऐलान के साथ-साथ सरकार के अगले कदम का भी इंतजार रहेगा।

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