पांच साल तक जारी रह सकेगी सेवा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि 65 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होने के बाद अनुभवी चिकित्सकों की सेवाओं का इस्तेमाल दोबारा किया जा सकेगा। इससे अस्पतालों को लंबे अनुभव वाले डॉक्टर मिलेंगे और मरीजों को भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का लाभ मिलता रहेगा। सरकार का उद्देश्य खासतौर पर उन अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी कम करना है, जहां चिकित्सकों के पद लंबे समय से खाली हैं।
सीएचसी और पीएचसी को भी मिलेगा लाभ
इस फैसले का असर सिर्फ बड़े सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी वाले विभागों को इससे विशेष राहत मिल सकती है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को इलाज और चिकित्सकीय सलाह के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अनुभव का सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर विभाग इस व्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है। उनका कहना है कि प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग में चिकित्सा अधिकारी और विशेषज्ञ चिकित्सक सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी संभालते हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद भी योग्य चिकित्सकों को सेवा का अवसर मिलने से उनके वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ मरीजों को मिल सकेगा।
विभाग द्वारा आदेश जारी करने की प्रक्रिया शुरू
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को इस संबंध में जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि अनुभवी डॉक्टरों की सेवाएं जारी रखने से सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिकित्सकों की कमी का दबाव कम होगा और अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

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