पांच साल में बनेंगे 150 हथकरघा क्लस्टर
योजना के तहत अगले पांच वर्षों में प्रदेश में 150 हथकरघा क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 50 हजार से अधिक बुनकरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। कम से कम 25 बुनकरों के समूह को फर्म के रूप में पंजीकृत कराकर उन्हें संगठित तरीके से सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
बुनकरों को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे
1. सौर ऊर्जा वाले करघे पर सब्सिडी: बिजली का खर्च घटाने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले करघों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन पर अधिकतम 80 प्रतिशत तक सहायता मिलने की बात कही गई है।
2. सस्ता धागा और कच्चा माल: धागे की बढ़ती कीमत से राहत देने के लिए धागा बैंक जैसी व्यवस्था के जरिए बुनकरों को उचित दर पर कच्चा माल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है।
3. सीधे बाजार तक पहुंच: बुनकरों को ऑनलाइन बाजार और सरकारी खरीद मंचों से जोड़ने पर जोर है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उत्पाद बेचने का बेहतर अवसर मिलेगा।
4. आसान ऋण की सुविधा: करघा लगाने या कारोबार बढ़ाने के लिए बुनकरों को ऋण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, जिससे उन्हें अपना काम विस्तार देने में मदद मिलेगी।
5. आधुनिक डिजाइन की ट्रेनिंग: बदलते बाजार के अनुसार नए डिजाइन और आधुनिक तकनीक की जानकारी देने के लिए बुनकरों और नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने की योजना है।
गांव से देश-दुनिया तक पहुंचेगा सामान
योजना का एक अहम उद्देश्य बुनकरों के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाना है। ऑनलाइन बिक्री के माध्यम से गांव में तैयार कपड़े और हस्तकरघा उत्पाद देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशी बाजारों तक भी पहुंच सकेंगे। इससे बुनकरों को अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।

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