पहली राहत: इलाज और जांच की सुविधा
CGHS के तहत लाभार्थी सरकारी पॉलीक्लिनिक और अस्पतालों में ओपीडी इलाज करा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह, दवाइयां और निर्धारित जांच की सुविधा भी मिलती है। योजना से जुड़े अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में पात्र मामलों में कैशलेस इलाज का प्रावधान भी है। आपात स्थिति में निजी अस्पताल में हुए खर्च की तय नियमों के अनुसार प्रतिपूर्ति की जा सकती है।
दूसरी खुशखबरी: परिवार को भी मिलता है लाभ
इस योजना का दायरा केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं है। पात्र पति या पत्नी और नियमों के अनुसार बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्यों को भी कवर मिल सकता है। स्थायी रूप से दिव्यांग बेटे के लिए आजीवन लाभ का प्रावधान है। वहीं बेटी को शादी या कमाई शुरू करने तक योजना का लाभ मिल सकता है। कुछ आश्रित रिश्तेदारों के लिए आय और साथ रहने जैसी शर्तें लागू होती हैं।
तीसरी राहत: मामूली मासिक योगदान में स्वास्थ्य सुविधा
CGHS के लिए कर्मचारियों को उनके पे लेवल के आधार पर मासिक योगदान देना होता है। लेवल 1 से 5 के लिए यह राशि ₹250, लेवल 6 के लिए ₹450, लेवल 7 से 11 के लिए ₹650 और लेवल 12 या उससे ऊपर के लिए ₹1,000 मासिक है। इसके बदले पात्र लाभार्थियों को ओपीडी, दवाइयों, जांच और अस्पताल से जुड़ी कई स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हैं।
CGHS कार्ड के लिए कर्मचारी और पेंशनर्स ऐसे करें आवेदन
CGHS कार्ड बनवाने के लिए कर्मचारी और पेंशनर्स को अपनी श्रेणी के अनुसार जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होते हैं। इसके बाद CGHS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन में व्यक्तिगत और परिवार की जानकारी भरने के साथ आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। कार्ड जारी होने के बाद इसकी यूनिक आईडी के जरिए CGHS से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।

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