करीब 1000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट
इस परियोजना पर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। खास बात यह है कि सड़क चौड़ी करने के लिए नई जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा मार्ग के आसपास पर्याप्त जगह उपलब्ध होने से काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित हाईवे लखनऊ की आउटर रिंग रोड से शुरू होकर सीतापुर तक जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सात जगह बनाए जाएंगे अंडरपास
यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए रास्ते में सात स्थानों पर अंडरपास बनाए जाने की योजना है। इससे स्थानीय वाहनों को मुख्य हाईवे पर बार-बार कट लेने और यू-टर्न की जरूरत कम होगी। इससे जाम और सड़क हादसों का खतरा भी घट सकता है।
इस परियोजना का असर लखनऊ-सीतापुर मार्ग से जुड़ी महोली, सीतापुर, हरगांव, लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद, सिधौली और मिश्रिख विधानसभा क्षेत्रों पर पड़ेगा।
डेढ़ साल में पूरा होने की उम्मीद
परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं होने से करीब एक से डेढ़ साल में काम पूरा होने की संभावना है। हाईवे के छह लेन होने के बाद लखनऊ और सीतापुर के बीच आवागमन तेज होने के साथ स्थानीय लोगों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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