विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने संस्थानों के प्राचार्यों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। सरकार का मकसद छात्रों को बेहतर और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने के साथ मेस व्यवस्था की निगरानी को मजबूत करना है।
खराब खाने की शिकायतों के बाद फैसला
दरअसल, कई तकनीकी संस्थानों में पिछले कुछ समय से हॉस्टल के भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्रों की शिकायतें सामने आ रही थीं। कुछ परिसरों में विद्यार्थियों ने विरोध-प्रदर्शन भी किया था। इसी के बाद विभाग ने मेस व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया।
एमआईटी में हॉस्टल का खाना खाने के बाद कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की घटना ने भी इस मुद्दे को गंभीर बना दिया था। जांच के दौरान भोजन और साफ-सफाई से जुड़ी कमियां सामने आने के बाद विभाग ने व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम उठाया।
छात्रों को बेहतर भोजन, महिलाओं को रोजगार
जीविका समूह पहले से ही कई सरकारी संस्थानों में भोजन व्यवस्था से जुड़े काम कर रहे हैं। अब तकनीकी कॉलेजों के हॉस्टल भी इस दायरे में आने से छात्रों को साफ-सुथरा और पौष्टिक भोजन मिलने की उम्मीद है।
साथ ही इस व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी बनेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इससे हॉस्टल मेस से जुड़ी शिकायतों में कमी आएगी और संस्थानों में बेहतर माहौल तैयार होगा।।

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