बदलाव की मुख्य बातें
पहले विभाग प्रमुखों के पास पांच लाख रुपये तक के इलाज की स्वीकृति देने का अधिकार था। लगभग दस साल बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सीमा को बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया है। यह कदम कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने और उन्हें महंगे इलाज में राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
नए आदेश के अनुसार, यदि इलाज का खर्च 10 लाख रुपये से अधिक हो, तो केंद्र की ओर से नामित अधिकारी से विशेष अनुमति लेनी पड़ेगी। यह व्यवस्था कर्मचारियों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने में मदद करेगी।
कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग नियम
आल इंडिया ऑडिट अकाउंट्स पेंशनर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय ने बताया कि यह सुविधा केवल वर्तमान कर्मचारियों के लिए है। पेंशनभोगियों के लिए अभी कोई नया निर्देश नहीं जारी किया गया है।
इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी और उन्हें इलाज के खर्च के बोझ से राहत मिलेगी। जानकारों का मानना है कि यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा सुधार है और कर्मचारियों की जीवनशैली और मानसिक संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

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