यह मुद्दा गायघाट की विधायक कोमल सिंह ने सदन में उठाया था। उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के केवल 0.95 प्रतिशत स्कूलों में ही यह सुविधा उपलब्ध है, जबकि नीति के अनुसार सभी माध्यमिक और उच्च विद्यालयों में वेंडिंग मशीन और सेनेटरी पैड निस्तारण के लिए भस्मक (इंसिनरेटर) लगाया जाना प्रस्तावित है।
क्यों जरूरी है यह व्यवस्था?
माहवारी स्वच्छता प्रबंधन केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा और लैंगिक समानता से भी जुड़ा हुआ है। ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में पढ़ने वाली कई छात्राएं आवश्यक संसाधनों के अभाव में स्कूल से अनुपस्थित रहती हैं। यदि स्कूल परिसर में ही सेनेटरी पैड उपलब्ध हो और उनके सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था हो, तो इससे छात्राओं की उपस्थिति बढ़ेगी, आत्मविश्वास मजबूत होगा और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी।
40 करोड़ की स्वीकृति, प्रक्रिया तेज
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य कैबिनेट ने इस योजना के लिए 40 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके बाद निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही फाइनेंशियल बिड खोली जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो महीनों के भीतर अधिकांश स्कूलों में मशीनें लगा दी जाएं। जिन विद्यालयों में किसी कारणवश स्थापना नहीं हो पाएगी, उन्हें अगले वित्तीय वर्ष में शामिल किया जाएगा।
बदलाव की दिशा में ठोस कदम
बिहार में किशोरियों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए यह योजना एक आधारभूत सुधार के रूप में देखी जा रही है। इससे छात्राओं को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि माहवारी से जुड़े सामाजिक संकोच को भी कम करने में मदद मिलेगी।
यदि योजना तय समय में लागू हो जाती है, तो यह राज्य के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और छात्राओं के अनुकूल वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।

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