बता दें की इन नई लाइनों के बनने से ट्रेनों की गति बढ़ेगी और माल व यात्री परिवहन अधिक कुशल और किफायती होगा। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न जिलों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों में भी सुधार होगा।
परियोजना का दायरा और लागत
केंद्रीय कैबिनेट ने पुनारख से किऊल के बीच 50 किलोमीटर लंबी तीसरी-चौथी लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है, जिसकी अनुमानित लागत 2,268 करोड़ रुपये है। इस परियोजना को तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा डीडीयू से झाझा तक 400 किलोमीटर में 17,000 करोड़ रुपये की लागत से चरणवार तीसरी और चौथी लाइन बनाई जाएगी।
इस योजना के तहत किऊल नदी पर 14 बड़े पुल, 18 अन्य पुल और 62 छोटी पुलियों के निर्माण के साथ चार लेवल क्रॉसिंग भी बनाए जाएंगे। इसके पूरा होने पर माल ढुलाई की सालाना लागत में लगभग 350 करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है।
निर्माण की रूपरेखा
परियोजना को छोटे-छोटे रेलखंडों में बांटा गया है ताकि निर्माण कार्य सुचारू रूप से पूरा हो सके। प्रमुख खंड इस प्रकार हैं:
पंडित दीनदयाल उपाध्याय से पटना तक तीसरी और चौथी लाइन।
नेऊरा-जटडुमरी-दनियावां मार्ग से फतुहा तक चौथी लाइन।
फतुहा से किऊल तक तीसरी और चौथी लाइन।
किऊल से झाझा तक केवल तीसरी लाइन।
राजेंद्रनगर से फतुहा तक तीसरी लाइन।
पहले चरण में फतुहा से बख्तियारपुर (24 किलोमीटर) और बख्तियारपुर से पुनारख (30 किलोमीटर) के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। बिहार के लिए यह परियोजना न केवल यात्री सुविधा बढ़ाने वाली है बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति में भी अहम योगदान देगी।
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