घरेलू उद्योग को बढ़ावा
अमेरिका का कहना है कि यह शुल्क घरेलू सोलर कंपनियों की सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है। लेकिन उच्च शुल्क विदेशी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच को कठिन बना सकता है और इस कदम से लागत में वृद्धि की संभावना भी बनती है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति
नए शुल्क अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में रद्द किए गए बड़े ग्लोबल टैरिफ से अलग हैं। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने 10% का नया टैरिफ भी लागू किया था, जिसे बाद में 15% तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है। इसी महीने की शुरुआत में भारत के साथ व्यापार समझौता हुआ था, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना था।
भारत से सोलर आयात का परिदृश्य
2025 की पहली छमाही में अमेरिका ने कुल सोलर मॉड्यूल इंपोर्ट का 57% हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से प्राप्त किया। भारत से सोलर आयात का मूल्य 2024 में लगभग 792.6 मिलियन डॉलर रहा, जो 2022 के मुकाबले लगभग 9 गुना अधिक है। इस दौरान कई डेवलपर्स ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से पैनल मंगाना शुरू किया था।
बाजार और कंपनियों पर क्या असर?
विशेषज्ञ बताते हैं की इतनी ऊंची शुल्क दर भारतीय सोलर पैनल कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार को चुनौतीपूर्ण बना सकती है। वहीं, अमेरिकी सोलर समूह एलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड ने इस कदम के समर्थन में कहा कि घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना जरूरी है। इस निर्णय से भारत की सोलर इंडस्ट्री को अमेरिकी बाजार में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

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