सरकार ने दी खुशखबरी, खाद्य तेलों की कीमतें होगी कम

नई दिल्ली। महंगाई से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती करने का फैसला लिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में बाजार में तेल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि 31 मई के बाद खुदरा बाजार में नई दरें लागू हो सकती हैं।

क्या बदला है?

सरकार ने कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है। यानी आयात करने वाली कंपनियों को अब पहले की तुलना में कम टैक्स देना होगा। इससे उनकी लागत घटेगी और उसका असर सीधे बाजार भाव पर दिखाई दे सकता है।

उपभोक्ताओं को कितना फायदा?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए आयात शुल्क में कमी का असर सीधा रसोई तक पहुंचता है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में तेल की कीमतों में प्रति लीटर कुछ रुपये की कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि यह गिरावट अलग-अलग ब्रांड और राज्यों में अलग हो सकती है।

किन देशों से आता है तेल?

देश में इस्तेमाल होने वाला पाम ऑयल मुख्य रूप से मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया जाता है। वहीं सूरजमुखी तेल की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा यूक्रेन और रूस से आता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकारी नीतियों का असर भारतीय बाजार पर तेजी से पड़ता है।

उद्योग और किसानों की नजर

खाद्य तेल उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस फैसले को सकारात्मक बताया है और उम्मीद जताई है कि इससे बाजार में स्थिरता आएगी। हालांकि कुछ कृषि जानकारों का मानना है कि सस्ता आयात बढ़ने से घरेलू तिलहन उत्पादकों को प्रतिस्पर्धा का दबाव झेलना पड़ सकता है।

फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए यह खबर राहत भरी है। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले समय में खाने के तेल के दाम संतुलित रहने की संभावना है।

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