8वें वेतन आयोग: लेवल 1 से 18 तक अलग हो सकता है फिटमेंट फैक्टर?

नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। हर कर्मचारी जानना चाहता है कि नई सिफारिशों के बाद उसकी बेसिक सैलरी कितनी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर की गणना और लागू करने का तरीका पिछली बार से अलग हो सकता है।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?

एक प्रकार का 'मल्टीप्लायर' या गुणांक है जिसका उपयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मूल वेतन  और पेंशन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। 

इसका सीधा सूत्र है:

संशोधित मूल वेतन = वर्तमान मूल वेतन × फिटमेंट फैक्टर 

2.5 फिटमेंट फैक्टर पर संभावित असर

यदि 18,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर 2.5 का गुणांक लागू किया जाए, तो नई बेसिक सैलरी 45,000 रुपये के आसपास पहुंच सकती है। इसके अलावा एचआरए, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्ते अलग से मिलेंगे, जिससे कुल वेतन और बढ़ेगा।

3.2 फिटमेंट फैक्टर की मांग क्यों?

कर्मचारी संगठनों के कुछ प्रतिनिधि, जिनमें मंजीत सिंह पटेल भी शामिल हैं, 3.2 फिटमेंट फैक्टर की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वेतन और महंगाई के अंतर को पाटने के लिए यह जरूरी है। अगर 3.2 लागू होता है तो एंट्री लेवल की बेसिक सैलरी करीब 57 से 58 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।

क्या सभी लेवल पर एक जैसा फैक्टर?

संभावना जताई जा रही है कि पे मैट्रिक्स के सभी 18 लेवल पर एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू न किया जाए। निचले लेवल (1 से 5) के कर्मचारियों के लिए ज्यादा गुणांक और ऊपरी लेवल के लिए अलग दर तय की जा सकती है, ताकि वेतन अंतर कम हो सके। इससे शुरुआती वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत अधिक राहत मिल सकती है।

कर्मचारियों के लिए आगे क्या है उम्मीद ?

अब निगाहें आयोग की आगामी बैठकों पर टिकी हैं। 25 फरवरी को प्रस्तावित बैठक में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को विस्तार से रख सकते हैं। अंतिम सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होगा कि फिटमेंट फैक्टर कितना तय किया जाता है और कर्मचारियों की सैलरी में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी। फिलहाल इतना तय है कि फिटमेंट फैक्टर ही 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का सबसे अहम आधार बनेगा और इसी से लाखों कर्मचारियों की आय में संभावित बदलाव तय होगा।

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