घर खरीद रहे हैं? ये 5 डॉक्यूमेंट चेक न किए तो भारी पड़ेगा!

नई दिल्ली। घर लेना जीवन का बड़ा निवेश होता है, इसलिए इसे जल्दबाजी में करना भारी पड़ सकता है। सही तरीके से सभी जरूरी कागजात की जांच करना बेहद अहम है। इससे भविष्य में किसी लीगल झंझट या आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।

1. टाइटल डीड

यह दस्तावेज बताता है कि संपत्ति का असली मालिक कौन है और विक्रेता के पास बेचने का अधिकार है। टाइटल में किसी प्रकार का विवाद या दावा नहीं होना चाहिए। पुराने रिकॉर्ड की जांच करने से भी धोखाधड़ी और कानूनी परेशानी टाली जा सकती है।

2. सेल डीड 

सेल डीड वह दस्तावेज है जो मालिकाना हक का अधिकार खरीदार को ट्रांसफर करता है। इसे रजिस्टर्ड कराना अनिवार्य है। इसमें संपत्ति का विवरण, विक्रेता और खरीदार का नाम और कीमत साफ-साफ लिखी होती है।

3 .एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट

एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट दिखाता है कि संपत्ति पर कोई बंधक, कर्ज या कानूनी दावा तो नहीं है। इसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से हासिल किया जा सकता है। पिछले कई सालों का रिकॉर्ड देखकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्रॉपर्टी पर कोई छुपी देनदारी नहीं है।

4. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट

फ्लैट या मकान खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि बिल्डिंग प्लान स्थानीय प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त है। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण कानून और सुरक्षा मानकों के अनुसार हुआ है। इसके बिना बिजली-पानी कनेक्शन या अन्य सेवाओं में समस्या हो सकती है।

5. प्रॉपर्टी टैक्स रसीद

ताजा टैक्स रसीद यह पुष्टि करती है कि सभी कर समय पर जमा किए गए हैं। म्यूटेशन रिकॉर्ड दिखाता है कि सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति सही मालिक के नाम पर दर्ज है।

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