'पर्म' पनडुब्बी होगी नई ताकत
रूसी नौसेना के कमांडर-इन-चीफ एडमिरल अलेक्जेंडर मोइसेयेव के अनुसार, 'पर्म' नाम की नई यासेन-एम श्रेणी की परमाणु अटैक पनडुब्बी को इस वर्ष नौसेना में शामिल करने की तैयारी है। यह इस श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी होगी। रूस का कहना है कि इस पनडुब्बी में जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ अत्याधुनिक सेंसर, रोबोटिक सिस्टम और आधुनिक युद्धक उपकरण लगाए गए हैं, जिससे इसकी मारक क्षमता और परिचालन दक्षता में बढ़ोतरी होगी।
जिरकॉन मिसाइल क्यों है खास?
जिरकॉन मिसाइल को रूस अपनी सबसे उन्नत हाइपरसोनिक मिसाइलों में शामिल करता है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, यह लगभग 1,000 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम बताई जाती है और इसकी गति मैक 9 तक पहुंच सकती है। रूस का दावा है कि यह मिसाइल उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पोसाइडन सिस्टम पर भी काम जारी
रूस ने यह भी संकेत दिया है कि उसकी समुद्री रक्षा परियोजनाओं में पोसाइडन नामक परमाणु-सक्षम मानव रहित अंडरवाटर सिस्टम पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह एक रणनीतिक परियोजना मानी जाती है, जिसका उद्देश्य लंबी दूरी तक समुद्र के भीतर विशेष सैन्य अभियानों को अंजाम देना है। हालांकि, इस प्रणाली की वास्तविक तैनाती और पूर्ण क्षमता को लेकर सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी उपलब्ध है।
वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर नजर
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि हाइपरसोनिक हथियारों और नई पीढ़ी की परमाणु पनडुब्बियों पर बढ़ता निवेश वैश्विक सैन्य प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है। रूस, अमेरिका और नाटो देशों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की होड़ पहले से ही जारी है और नई तकनीकों का विकास इस प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

0 comments:
Post a Comment