57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों पर पड़ा असर
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के 57,694 निवर्तमान ग्राम प्रधान पंचायत चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासकीय जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें पहले की तरह मिलने वाला ₹5,000 प्रतिमाह मानदेय फिलहाल बंद हो गया है। इसके अलावा असामयिक निधन की स्थिति में कल्याण कोष से मिलने वाली ₹10 लाख की आर्थिक सहायता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
संगठनों ने सरकार से की मांग
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पंचायती राज विभाग को पत्र भेजकर मांग की है कि प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे सभी ग्राम प्रधानों का मानदेय और कल्याण कोष की सुविधा तत्काल प्रभाव से बहाल की जाए। संगठन का कहना है कि जब सरकार ग्राम प्रधानों से प्रशासनिक कार्य करा रही है, तो उन्हें पहले की तरह आर्थिक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
चुनाव में देरी का खामियाजा?
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि पंचायत चुनाव समय पर न होना ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक उन्हें मिलने वाले मानदेय और अन्य लाभ बंद करना उचित नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि जिम्मेदारियां पहले जैसी ही हैं, इसलिए सुविधाएं भी जारी रहनी चाहिए।
आंदोलन की चेतावनी
ग्राम प्रधानों के एक अन्य संगठन ने भी सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक आदेश जारी नहीं किया गया, तो अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जा सकता है। इससे पंचायत स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल ग्राम प्रधानों को मानदेय और कल्याण कोष की सुविधा बहाल करने संबंधी कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में हजारों ग्राम प्रधान सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो प्रदेश के सभी प्रशासक के रूप में कार्यरत ग्राम प्रधानों को बड़ी राहत मिल सकती है।

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