अब सिर्फ ऑनलाइन होगी ट्रांसफर प्रक्रिया
नई गाइडलाइन के अनुसार शिक्षक स्थानांतरण से जुड़ी हर प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर विकसित किए जा रहे विशेष ट्रांसफर मॉड्यूल के जरिए पूरी की जाएगी। ऑफलाइन आवेदन, पत्र या किसी अन्य माध्यम से भेजी गई शिकायतों पर विचार नहीं किया जाएगा। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय की भी बचत होगी।
पहली बार आवेदन करने वालों को राहत
शिक्षा विभाग ने पहली बार स्थानांतरण आवेदन करने वाले शिक्षकों को भी राहत दी है। इस चरण में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा की शर्त में छूट देने का फैसला किया गया है। हालांकि, प्रोबेशन अवधि में कार्यरत शिक्षक और प्रधानाध्यापक इस प्रक्रिया में आवेदन के पात्र नहीं होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेवा अवधि और अनुभव की गणना 31 मार्च 2026 को आधार मानकर की जाएगी। इसके अलावा पिछले दो वर्षों के दौरान सामान्य या पारस्परिक स्थानांतरण प्राप्त कर चुके शिक्षक भी इस बार आवेदन कर सकेंगे।
अधिशेष शिक्षकों के लिए अलग व्यवस्था
जिन स्कूलों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां के अधिशेष शिक्षकों की सूची पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी। ऐसे शिक्षकों को कम से कम 30 रिक्त पद वाले स्कूलों में अपनी पसंद दर्ज करनी होगी। यदि कोई शिक्षक दूसरे जिले या दूसरे प्रमंडल में स्थानांतरण चाहता है, तो उसे पांच-पांच जिलों या प्रमंडलों का विकल्प देना अनिवार्य होगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा तबादला
नई गाइडलाइन के अनुसार स्थानांतरण प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले विद्यालयों में शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसके बाद पारस्परिक स्थानांतरण के मामलों का निपटारा संबंधित समिति करेगी। अंत में रिक्त पदों के आधार पर सामान्य स्थानांतरण किया जाएगा। यदि किसी एक विद्यालय के लिए एक से अधिक शिक्षक आवेदन करते हैं, तो पॉइंट आधारित प्रणाली लागू होगी और अधिक अंक प्राप्त करने वाले शिक्षक को प्राथमिकता मिलेगी।
इन शिक्षकों को विशेष राहत
शिक्षा विभाग ने 31 मार्च 2026 तक 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को विशेष राहत दी है। ऐसे शिक्षकों का स्थानांतरण उनकी इच्छा के बिना नहीं किया जाएगा। वहीं, असाध्य रोग, दिव्यांगता या गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों के मामलों में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
नई ट्रांसफर नीति लागू होने के बाद शिक्षकों को आवेदन से लेकर स्थानांतरण तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन मिलेगी। इससे अनावश्यक भागदौड़ कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य शिक्षकों को निर्धारित नियमों के अनुसार समय पर स्थानांतरण का लाभ मिल सकेगा। साथ ही विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित वितरण भी सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

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