20 राज्यों के 40 जिलों में शुरू हुई नई व्यवस्था
सरकार ने फिलहाल इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 20 राज्यों के 40 जिलों में लागू किया है। नई प्रणाली के तहत किसानों को उनकी भूमि के रिकॉर्ड और बोई गई फसल के आधार पर सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे उर्वरकों का बेहतर प्रबंधन होगा और जरूरतमंद किसानों तक समय पर खाद पहुंचाई जा सकेगी।
मोबाइल ऐप से होगी खाद की बुकिंग
नई व्यवस्था के तहत किसान या उनका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकेगा। पंजीकरण के दौरान भूमि का विवरण और फसल संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार पहले से खाद की बुकिंग कर सकेगा। इससे मांग का सही अनुमान लगाने और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा दायरा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था फिलहाल परीक्षण के तौर पर लागू की गई है। पायलट परियोजना के अनुभव और परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद इसे अन्य राज्यों और जिलों में भी विस्तारित करने पर निर्णय लिया जाएगा। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।
DBT प्रणाली पहले से है लागू
देशभर में सब्सिडी वाली खाद की बिक्री पहले से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। इस व्यवस्था में आधार प्रमाणीकरण के बाद ही किसानों को रियायती दर पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक और पात्र किसानों तक ही पहुंचे।
करोड़ों किसानों को मिला लाभ
सरकार के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में लगभग 2.87 लाख सक्रिय उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से 746.57 लाख मीट्रिक टन सब्सिडी वाली खाद किसानों को उपलब्ध कराई गई। इस अवधि में करीब 8.4 करोड़ किसानों ने रियायती दर पर उर्वरक का लाभ उठाया, जबकि केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए 2.17 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया।

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