बिहार में शिक्षकों को अब ऐसे मिलेगा प्रमोशन, नए नियम लागू

पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्रोन्नति व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब सिर्फ वर्षों की नौकरी के आधार पर पदोन्नति नहीं मिलेगी, बल्कि कक्षा में उपस्थिति, शोध कार्य, प्रशिक्षण और अकादमिक प्रदर्शन भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे। राज्यपाल सह कुलाधिपति की मंजूरी के बाद कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS)-2026 लागू हो गई है, जिससे लंबे समय से रुकी प्रोन्नति प्रक्रिया को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

अब काम के आधार पर मिलेगी पदोन्नति

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके तहत शिक्षकों का मूल्यांकन केवल सेवा अवधि से नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उन्होंने पढ़ाई, शोध और विश्वविद्यालय की अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में कितना योगदान दिया है। यानी अब बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को प्रोन्नति में प्राथमिकता मिलेगी।

70 फीसदी कक्षाएं लेना होगा जरूरी

CAS-2026 के तहत नियमित पढ़ाई को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। अब प्रमोशन पाने के लिए शिक्षकों को कम से कम 70 प्रतिशत कक्षाएं लेना अनिवार्य होगा। जो शिक्षक 80 प्रतिशत या उससे अधिक कक्षाएं लेंगे, उन्हें उत्कृष्ट श्रेणी मिलेगी। वहीं 70 से 80 प्रतिशत तक उपस्थिति रखने वालों को संतोषजनक माना जाएगा। यदि किसी शिक्षक की कक्षा उपस्थिति 70 प्रतिशत से कम रहती है तो उसकी पदोन्नति प्रभावित हो सकती है।

इन मानकों पर होगी पूरी जांच

नई प्रोन्नति व्यवस्था में कई पहलुओं को शामिल किया गया है। शिक्षकों के शोध पत्र, प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी, प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन, रिसर्च स्कोर और विद्यार्थियों के बीच उनकी शैक्षणिक भूमिका का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके साथ ही वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (APAR) और चयन समिति की रिपोर्ट भी प्रोन्नति का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

शोध करने वालों को मिलेगा फायदा

नई नीति में रिसर्च को पहले से ज्यादा महत्व दिया गया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र, पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन और अकादमिक उपलब्धियां सीधे प्रोन्नति में मदद करेंगी। यानी जो शिक्षक शोध कार्यों में सक्रिय रहेंगे, उन्हें आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिलेगा।

अलग-अलग पदों के लिए तय हुई नई पात्रता

सहायक प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर बनने तक प्रत्येक स्तर के लिए अलग-अलग शर्तें तय की गई हैं। सेवा अवधि के साथ पीएचडी, ओरिएंटेशन कोर्स, रिफ्रेशर कोर्स, शोध पत्रों की संख्या और न्यूनतम रिसर्च स्कोर पूरा करना अनिवार्य होगा। इससे प्रोन्नति प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनेगी।

लंबे समय से रुके मामलों को मिलेगी रफ्तार

विश्वविद्यालयों में कई शिक्षकों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित थी। नई नियमावली लागू होने के बाद उम्मीद है कि इन मामलों का तेजी से निपटारा होगा। साथ ही भविष्य में भी प्रोन्नति प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार समय पर पूरी की जा सकेगी।

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