3,030 करोड़ रुपये की योजना
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 3,030 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसमें से 3,000 करोड़ रुपये केमिकल पार्कों के निर्माण, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक सुविधाओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपये प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
राज्यों की भी होगी अहम भागीदारी
योजना के तहत प्रत्येक केमिकल पार्क के विकास के लिए केंद्र सरकार अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक की सहायता देगी। वहीं, संबंधित राज्य सरकार को कम से कम 500 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। पार्कों के चयन की प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी आधार पर होगी, जिसमें इच्छुक राज्य अपनी परियोजनाएं प्रस्तुत करेंगे।
आधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस पार्क
प्रत्येक केमिकल पार्क का क्षेत्रफल कम से कम 8 वर्ग किलोमीटर होगा। इन पार्कों में उद्योगों के लिए ऐसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे नई कंपनियां बिना अधिक समय गंवाए उत्पादन शुरू कर सकें।
कई उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार का मानना है कि इन केमिकल पार्कों के विकसित होने से रसायन उद्योग की उत्पादन लागत और परिवहन खर्च में कमी आएगी। इसका लाभ केवल केमिकल सेक्टर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, दवा उद्योग, वस्त्र उद्योग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों को भी मिलेगा।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई योजना से देश में घरेलू और विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है। बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट स्थापित होने से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही भारत को वैश्विक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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