अगस्त के बिल में राहत
पिछले महीने जुलाई में उपभोक्ताओं को बिजली बिल में 4.43 प्रतिशत की राहत दी गई थी। अब अगस्त में भी बिजली खरीद की लागत कम रहने के कारण बिल में 2.92 प्रतिशत की कमी का लाभ मिलेगा। इससे घरेलू, व्यावसायिक और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के बिजली खर्च में कुछ कमी आएगी।
क्यों घटा बिजली बिल?
एफपीपीसीए व्यवस्था के तहत बिजली खरीद और ईंधन की वास्तविक लागत के आधार पर अधिभार तय किया जाता है। यदि बिजली खरीद की लागत अनुमान से कम रहती है, तो उसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं को बिजली बिल में दिया जाता है। मई महीने के लिए निर्धारित अनुमानित लागत की तुलना में वास्तविक बिजली खरीद लागत कम रही। इसी वजह से अगस्त के बिलों में ईंधन अधिभार घटाया गया है और उपभोक्ताओं को कम राशि का भुगतान करना होगा।
पहले 10 प्रतिशत अतिरिक्त अधिभार वसूला गया था
इससे पहले बिजली खरीद लागत के समायोजन के नाम पर जून महीने में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार लिया गया था। बाद में इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठे और बिजली नियामक आयोग ने स्पष्ट किया कि अधिभार केवल वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर ही तय किया जाएगा।
आयोग के निर्देशों के बाद ईंधन अधिभार की गणना में संशोधन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप पहले जुलाई और अब अगस्त के बिजली बिल में राहत दी जा रही है। सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा। अनुमान है कि अगस्त महीने में बिजली बिलों में कमी आने से उपभोक्ताओं की कुल ₹221 करोड़ से अधिक की बचत होगी।

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