यह फैसला विश्वविद्यालय की वित्त समिति की बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की। बैठक में शिक्षकों के हितों और शोध गतिविधियों को मजबूत करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
अब अधिक संविदा शिक्षकों को मिलेगा लाभ
अब तक यूजीसी वेतनमान का लाभ केवल इंजीनियरिंग, कृषि, होटल मैनेजमेंट और फार्मेसी जैसे कुछ स्ववित्तपोषित विभागों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसरों तक सीमित था। नए निर्णय के बाद इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। अब बीए एलएलबी, मैनेजमेंट, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस सहित अन्य स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत संविदा सहायक प्रोफेसर भी इस वेतनमान के पात्र होंगे। इससे बड़ी संख्या में शिक्षकों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।
₹57,700 होगी प्रारंभिक बेसिक सैलरी
विश्वविद्यालय के फैसले के अनुसार पात्र संविदा सहायक प्रोफेसरों को यूजीसी पे-स्केल के अनुरूप ₹57,700 का प्रारंभिक मूल वेतन दिया जाएगा। इससे शिक्षकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण में काम करने का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बेहतर वेतन मिलने से योग्य शिक्षकों को संस्थान से जोड़ने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
शोध कार्यों को भी मिलेगा प्रोत्साहन
वित्त समिति ने केवल वेतनमान पर ही नहीं, बल्कि शोध गतिविधियों को मजबूत करने के लिए भी अहम फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी शोधार्थी का शोध निर्देशक संबद्ध महाविद्यालय में कार्यरत है, तो पीएचडी पंजीकरण शुल्क का 10 प्रतिशत हिस्सा संबंधित कॉलेज को दिया जाएगा। इस राशि का उपयोग शोध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, शोध संसाधनों और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

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