केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी दफ्तरों में होंगे लागू!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सरकारी क्षेत्र की एक पुरानी कंपनी को मजबूती देने के लिए नई पहल की तैयारी में है। भारी उद्योग मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से अपील की है कि सरकारी बैठकों, सम्मेलनों, कैंटीन और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में 'यूल टी' (Yule Tea) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर लागू होती है, तो देशभर के सरकारी कार्यालयों में इस चाय की मांग काफी बढ़ सकती है।

मंत्रालय ने विभागों को भेजा पत्र

भारी उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में विभिन्न मंत्रालयों और उनके अधीन आने वाले विभागों एवं संस्थानों से कहा गया है कि वे सरकारी कंपनी द्वारा तैयार की गई यूल टी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करें। सरकार का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालय इस चाय का उपयोग करेंगे, तो कंपनी की बिक्री बढ़ेगी और उसे आर्थिक मजबूती मिलेगी।

क्यों खास है यूल टी?

यूल टी का उत्पादन एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड करती है, जो केंद्र सरकार के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है। कंपनी असम और पश्चिम बंगाल में कई चाय बागानों का संचालन करती है और विभिन्न प्रकार की चाय तैयार करती है। इसके प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं, ऑर्थोडॉक्स चाय, CTC चाय, ग्रीन टी, फ्लेवर्ड टी। कंपनी लंबे समय से संसद सहित कई सरकारी संस्थानों को चाय की आपूर्ति भी करती रही है।

संसदीय समिति की सिफारिश के बाद पहल

जानकारी के अनुसार, उद्योग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने सरकार को सुझाव दिया था कि सरकारी कंपनियों द्वारा तैयार उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। इसी सिफारिश के आधार पर मंत्रालय ने विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर यूल टी के इस्तेमाल को बढ़ाने की पहल शुरू की है। 

सरकारी कंपनी को मिल सकता है बड़ा फायदा

यदि यह व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है तो लाखों कप चाय की नियमित मांग सरकारी संस्थानों से ही उत्पन्न हो सकती है। इससे कंपनी को स्थायी ग्राहक मिलेंगे और उत्पादन तथा बिक्री दोनों में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी। इस तरह की संस्थागत खरीद से सरकारी कंपनियों को लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता मिल सकती है।

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