16 विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान
इस महत्वाकांक्षी योजना को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार के 16 विभाग मिलकर काम करेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों और ट्रेड में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार निजी कंपनियों और उद्योग जगत के साथ भी साझेदारी करेगी, जिससे प्रशिक्षण का स्तर बेहतर हो और युवाओं को बाजार की मांग के अनुरूप कौशल मिल सके।
सिर्फ ट्रेनिंग नहीं, रोजगार पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार करना है। प्रशिक्षण के बाद युवा निजी कंपनियों में नौकरी पा सकते हैं या अपने कौशल के आधार पर स्वयं का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं। इससे राज्य में स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
2026-27 में 4.65 लाख युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4,65,740 युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके बाद हर साल प्रशिक्षण की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि पांच वर्षों में कुल 50 लाख युवाओं तक योजना का लाभ पहुंच सके।
विभिन्न योजनाओं के तहत युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
राज्य और केंद्र सरकार की कई योजनाओं के माध्यम से युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रमुख लक्ष्य इस प्रकार हैं.
इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में 21,500 युवाओं को प्रशिक्षण।
पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 25 लाख युवाओं को प्रशिक्षण।
पीएम सेतु योजना के तहत 37,200 युवाओं को कौशल विकास।
कुशल युवा कार्यक्रम के तहत 18.37 लाख युवाओं को कौशल विकास।
ग्रीन इकोनॉमी में 5,400 और सर्कुलर इकोनॉमी में 7,000 युवाओं को प्रशिक्षण।
टाटा टेक सेंटर ऑफ इनोवेशन (COI) के माध्यम से 81,520 युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण।
डोमेन स्किलिंग में 1.22 लाख, बीएस एवं सीएफए के तहत 36 हजार तथा भर्ती-प्रशिक्षण-तैनाती योजना के अंतर्गत 70 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बिहार में रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार
सरकार का मानना है कि उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कौशल विकसित होने से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी। निजी कंपनियों में नौकरी के अवसर बढ़ने के साथ-साथ स्वरोजगार को भी मजबूती मिलेगी। यदि योजना तय समय पर लागू होती है, तो इससे बिहार के कौशल विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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