सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से भागलपुर, मुंगेर और आसपास के जिलों में आवागमन बेहतर होगा, साथ ही पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह पूरे पूर्वी बिहार की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
3,145 एकड़ से अधिक जमीन का होगा अधिग्रहण
नई योजना के तहत एयरपोर्ट निर्माण के लिए 3,145.2308 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के लिए करीब 1,329.58 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। राज्य सरकार के अनुसार यह परियोजना संशोधित मास्टर प्लान के आधार पर लागू की जाएगी, जिससे एयरपोर्ट का दायरा पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा।
भागलपुर और मुंगेर दोनों जिलों को मिलेगा लाभ
संशोधित योजना के अनुसार एयरपोर्ट का क्षेत्र दो जिलों में फैला होगा। लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा भागलपुर और 60 प्रतिशत हिस्सा मुंगेर जिले में विकसित किया जाएगा। भागलपुर जिले में करीब 1,425 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी, जबकि मुंगेर जिले में लगभग 1,720 एकड़ भूमि परियोजना के लिए ली जाएगी।
कई गांव होंगे परियोजना का हिस्सा
भूमि अधिग्रहण के लिए भागलपुर के सुल्तानगंज क्षेत्र के कई गांवों को शामिल किया गया है। वहीं मुंगेर जिले के बरियारपुर और असरगंज अंचल के विभिन्न गांव भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भूमि का मूल्यांकन निर्धारित न्यूनतम मूल्यांकन दर (MVR) के आधार पर किया जाएगा और नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।

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