योजना 21 सितंबर से 20 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। विभाग के मुताबिक, पात्र ईंट-भट्ठा संचालकों को बकाया राशि में शामिल ब्याज पर कुल 85 करोड़ रुपये तक की राहत मिल सकती है।
289 करोड़ से ज्यादा राशि अभी बाकी
विभाग के आंकड़ों के अनुसार ईंट-भट्ठों से कुल 316.66 करोड़ रुपये का राजस्व लंबित था। इसमें से 27.28 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि करीब 289.38 करोड़ रुपये अभी जमा होने बाकी हैं। इस योजना का लाभ उन मामलों में भी मिल सकेगा, जहां 31 अगस्त 2026 तक बकाया स्वामित्व राशि नहीं चुकाने पर नीलाम पत्र वाद दर्ज हो चुका है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत एकमुश्त भुगतान करने पर ब्याज माफी का लाभ मिल सकता है।
दूसरे भुगतान भी जरूरी
सिर्फ बकाया राशि जमा करना पर्याप्त नहीं होगा। योजना के तहत संबंधित संचालकों को जिला खनिज फाउंडेशन, आयकर और अन्य लागू करों का भुगतान भी करना होगा। इसके बाद संबंधित खनन पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर लंबित नीलाम पत्र मामलों के निपटारे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
विभाग ने योजना को लागू करने के लिए खनिज विकास पदाधिकारियों को जरूरी प्रशिक्षण भी दिया है। सरकार का लक्ष्य पुराने मामलों को सुलझाने के साथ लंबित राजस्व की वसूली को आसान बनाना है।

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