फिटमेंट फैक्टर क्या है?
फिटमेंट फैक्टर बेसिक सैलरी को बढ़ाने का एक मल्टीप्लायर होता है। इसे नई बेसिक सैलरी तय करने के लिए पुरानी बेसिक सैलरी से गुणा किया जाता है। उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था। यानी अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 7,000 रुपये थी, तो 2.57 से गुणा करने पर नई सैलरी 18,000 रुपये हो गई थी।
यदि इस बार फिटमेंट फैक्टर 1.60 रखा जाता है, तो भी केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में वृद्धि निश्चित है। वहीं, यदि सरकार इसे 2.0 या 2.5 के स्तर तक ले जाती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 34,000 रुपये से 51,000 रुपये तक पहुँच सकती है।
पेंशनर्स को भी फायदा
फिटमेंट फैक्टर केवल कर्मचारियों की सैलरी पर ही असर नहीं डालता, बल्कि पेंशनर्स की मूल पेंशन भी इसी फैक्टर से बढ़ाई जाती है। इसका मतलब है कि पेंशन में भी पर्याप्त बढ़ोतरी होगी, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वित्तीय राहत मिलेगी।
अंतिम फैसला कब होगा?
फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा, इसका निर्णय सरकार की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की मांग के आधार पर होगा। फिलहाल 1.60 का आंकड़ा तय माना जा रहा है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों की मांग इसे 2.86 से ऊपर रखने की है। सरकार की ओर से अंतिम घोषणा मार्च 2026 तक कैबिनेट की बैठक में हो सकती है।

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