अब तक जिन लोगों के पास पैन कार्ड नहीं होता था, वे आयकर विभाग से संबंधित फॉर्म 60 भरकर रजिस्ट्री करा लेते थे। लेकिन नई व्यवस्था के तहत इस विकल्प को समाप्त कर दिया गया है। शासन का मानना है कि इससे संपत्ति से जुड़े लेन–देन में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और संदिग्ध निवेश पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
आधार के साथ पैन सत्यापन भी जरूरी
रजिस्ट्री प्रक्रिया में पहले ही आधार कार्ड का सत्यापन और 20 हजार रुपये से अधिक के शुल्क का ऑनलाइन भुगतान अनिवार्य किया जा चुका है। अब पैन कार्ड को भी इसी प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है। रजिस्ट्री विभाग के सॉफ्टवेयर के माध्यम से पैन नंबर का ऑनलाइन सत्यापन होगा और उसके बाद ही विलेख पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
काले धन और अवैध निवेश पर रोक
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, पैन कार्ड की अनिवार्यता से संपत्ति से जुड़े लेन–देन का स्पष्ट वित्तीय रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे काले धन के उपयोग, बेनामी संपत्तियों और अवैध रूप से अर्जित धन से किए जा रहे निवेश की पहचान करना आसान होगा। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर भी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
सर्वर की धीमी गति बनी परेशानी
हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के साथ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं। आधार सत्यापन के दौरान सर्वर की धीमी गति के कारण रजिस्ट्री कार्य एक-दो घंटे तक प्रभावित रहा। इसके अलावा जिन लोगों के आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर बदल चुके हैं, उन्हें पहले आधार संशोधन केंद्र जाना पड़ रहा है, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ रही हैं।
गुरुवार से सख्ती से लागू नियम
रजिस्ट्री विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि गुरुवार से गोरखपुर के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में पैन कार्ड के बिना किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम वित्तीय अपराधों पर नियंत्रण और व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया है।

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