रूस-भारत की बड़ी तैयारी, अमेरिका के उड़े होश, चीन सन्न!

नई दिल्ली। भारत और रूस अपने द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच एक नए समुद्री मार्ग की तैयारी चल रही है, जिसे चेन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री कॉरिडोर कहा जा रहा है। यह प्रस्तावित मार्ग भारत के दक्षिणी तट को रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा, जिससे व्यापारिक आवाजाही तेज, सस्ती और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

इस नए कॉरिडोर के शुरू होने से भारत और रूस के बीच माल ढुलाई में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। वर्तमान में समुद्री रास्ते से भारत से रूस तक सामान पहुंचने में करीब 40 दिन या उससे अधिक का समय लगता है, जबकि नए मार्ग के जरिए यह अवधि घटकर लगभग 24 दिन रह सकती है। यानी व्यापारिक सामान करीब दो सप्ताह पहले अपने गंतव्य तक पहुंच सकेगा।

लॉजिस्टिक्स लागत में होगी बड़ी कटौती

कम समय में डिलीवरी होने से कंपनियों के लिए स्टोरेज और वेयरहाउसिंग का खर्च भी घटेगा। लंबे समय तक माल गोदामों में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत को नियंत्रित करना आसान होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो बड़े पैमाने पर निर्यात और आयात से जुड़ी हैं।

रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह मार्ग?

चेन्नई में रूस के काउंसल जनरल वैलेरी खोडझाएव के अनुसार यह समुद्री कॉरिडोर सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। रूस भारत के साथ व्यापार को अधिक संतुलित और स्थायी बनाना चाहता है। उनका कहना है कि दक्षिण भारत इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यहां औद्योगिक ढांचा काफी मजबूत है।

भारतीय कंपनियों को मिलेगा नया अवसर

कई भारतीय कंपनियां पहले से ही रूस के साथ व्यापार कर रही हैं। इनमें दवा उद्योग, कृषि उत्पाद, स्वास्थ्य सेवाएं, जहाज निर्माण और विमान निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। नए कॉरिडोर के शुरू होने से इन क्षेत्रों में व्यापार को और गति मिलने की उम्मीद है। स्थायी समुद्री रूट बनने से लंबी अवधि के व्यापारिक अनुबंध करना भी आसान होगा।

चुनौतियां और आगे की राह

हालांकि इस कॉरिडोर की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जहाजों का नियमित संचालन हो, तय समय-सारिणी का पालन किया जाए और वापसी के लिए भी पर्याप्त माल उपलब्ध रहे। यदि यह व्यवस्था सुचारू रूप से विकसित हो जाती है, तो यह मार्ग पारंपरिक और भीड़भाड़ वाले समुद्री रास्तों का एक मजबूत विकल्प बन सकता है।

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