बुधवार को जिलाधिकारी सहिला और अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों एवं तकनीकी अभियंताओं की टीम ने प्रस्तावित बाईपास मार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण की शुरुआत चिरैंयाटाड़ मोड़ से की गई, जहां से बाईपास धनसोई–दिनारा मुख्य पथ से जुड़ेगा। अधिकारियों ने मौके पर सड़क की संभावित चौड़ाई, भूमि की उपलब्धता, तकनीकी चुनौतियों और निर्माण से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं का आकलन किया।
इस परियोजना से लोगों को मिलेगी स्थायी राहत
यह बाईपास 2-लेन ग्रीनफील्ड परियोजना के तहत विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य धनसोई बाजार को भारी वाहनों के दबाव से मुक्त करना है। वर्तमान में बाजार क्षेत्र से होकर गुजरने वाले ट्रकों और अन्य बड़े वाहनों के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों को काफी परेशानी होती है। बाईपास के चालू होने के बाद भारी वाहनों को बाजार में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा, जिससे स्थानीय यातायात सुचारु होगा और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी कम होगी।
बक्सर–रोहतास आवागमन होगा आसान
इस नए बाईपास के निर्माण से बक्सर और रोहतास जिलों के बीच आवागमन अधिक सुगम, सुरक्षित और तेज हो जाएगा। यात्रियों का समय बचेगा और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। इसके साथ ही क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
98 करोड़ रुपये की मिली मंजूरी
जानकारी के अनुसार, करीब 4.50 किलोमीटर लंबाई वाले इस बाईपास के निर्माण के लिए लगभग 98 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। परियोजना के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि निर्माण कार्य में अनावश्यक देरी न हो।
विकास को मिलेगी नई गति
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि बाईपास के निर्माण से न केवल जाम की समस्या खत्म होगी, बल्कि धनसोई और आसपास के क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलेगी। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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