भारत-अमेरिका की बीच बड़ी रक्षा डील? चीन सन्न, पाक के उड़े होश!

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के रिश्ते बीते कुछ वर्षों में रणनीतिक साझेदारी के एक नए स्तर पर पहुंचे हैं। इसी कड़ी में दोनों देशों के बीच एक बड़ी रक्षा डील आकार लेती दिख रही है, जिसका सीधा असर हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। प्रस्तावित समझौते के तहत भारत अपनी नौसेना के लिए अत्याधुनिक P-8I समुद्री गश्ती और पनडुब्बी रोधी विमान खरीदने की तैयारी में है।

यह डील लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर की बताई जा रही है। अगर इसे अंतिम मंजूरी मिलती है, तो भारतीय नौसेना के बेड़े में छह नए P-8I विमान शामिल होंगे। ये विमान पहले से मौजूद P-8I फ्लीट की ताकत को और बढ़ाएंगे, जो फिलहाल देश के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री मोर्चों पर तैनात हैं।

क्यों अहम हैं P-8I विमान?

P-8I विमान आधुनिक समुद्री युद्ध के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनमें लंबी दूरी तक निगरानी करने, दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर सटीक कार्रवाई करने की क्षमता होती है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान की समुद्री गतिविधियों को देखते हुए ये विमान भारत के लिए रणनीतिक बढ़त देते हैं।

ड्रोन युग में कदम

सिर्फ मानव संचालित विमानों तक ही भारत की तैयारी सीमित नहीं है। नौसेना अपनी निगरानी और खुफिया क्षमताओं को ड्रोन तकनीक से भी मजबूत कर रही है। आने वाले वर्षों में MQ-9 सी गार्डियन जैसे हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेंगे। ये ड्रोन लंबे समय तक समुद्र के ऊपर उड़ान भरकर रियल-टाइम जानकारी देने में सक्षम होंगे।

इसके अलावा, भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में MALE श्रेणी के ड्रोन शामिल किए जाने की योजना है, जिनमें से महत्वपूर्ण हिस्सा नौसेना को मिलेगा। इससे समुद्री सुरक्षा में तकनीकी बढ़त और आत्मनिर्भरता दोनों को बल मिलेगा।

क्षेत्रीय संदेश साफ

भारत और अमेरिका की यह संभावित रक्षा डील सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी मजबूत करती है। यह संकेत देती है कि भारत समुद्री सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक संतुलन को लेकर पूरी तरह सजग और तैयार है।

0 comments:

Post a Comment