इस चौथे चरण में कक्षा 9 से 12 तक लगभग 25,000 पदों और कक्षा 1 से 8 तक लगभग 19,000 पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इससे राज्य में कुल शिक्षकों की संख्या बढ़कर लगभग 6 लाख 40 हजार हो जाएगी। वर्तमान में राज्य में 29 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। नई भर्ती के बाद यह अनुपात सुधरकर लगभग 27 छात्रों पर एक शिक्षक हो जाएगा, जिससे बच्चों को बेहतर शिक्षा और मार्गदर्शन मिल सकेगा।
बिहार के युवाओं और महिलाओं के लिए विशेष लाभ
इस बार की भर्ती में राज्य के अभ्यर्थियों के लिए लगभग 85 फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी। केवल 15 फीसदी सीटें ऐसे उम्मीदवारों के लिए होंगी जिनके अध्ययन या डिग्री किसी अन्य राज्य से हैं। इसके अलावा, कक्षा 5 तक के शिक्षकों में 50 प्रतिशत और अन्य कोटियों में 35 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। इस नीति से बिहार की महिला अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का बेहतर अवसर मिलेगा।
शिक्षा विभाग का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक सभी रिक्तियों को बीपीएससी को भेजना था, लेकिन विभिन्न वर्गों के आरक्षण रोस्टर को क्लियर करने में समय लग गया। विधानसभा चुनाव के कारण नवंबर तक जिलों से रिक्तियों का संकलन भी पूरा नहीं हो सका। चौथे चरण की टीआरई भर्ती से न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, बल्कि बिहार में शिक्षा का ढांचा और मजबूत होगा। राज्य के लाखों छात्रों को अब बेहतर शिक्षक और बेहतर शिक्षा मिलने की उम्मीद है।

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