अमेरिका ने भेजा जेट इंजन, तेजस-MKI प्रोजक्ट ने पकड़ी रफ्तार!

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के तेजस Mk1A फाइटर जेट प्रोजेक्ट में अब तेजी आने लगी है। अमेरिका से एक और GE एयरोस्पेस का F404 इंजन भारत पहुंच चुका है। पिछले कुछ महीनों से हर माह औसतन एक इंजन की सप्लाई हो रही है, जिससे HAL को विमान निर्माण और वायुसेना को सौंपने की प्रक्रिया में मदद मिली है।

छठा इंजन मिला, उत्पादन को गति

अब तक GE एयरोस्पेस ने कुल छह F404 इंजन भारत को सप्लाई किए हैं। जनवरी में मिले छठे इंजन के साथ HAL मार्च 2026 तक पांच तेजस Mk1A विमान वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य पूरा करने की तैयारी में है। यह संख्या भले ही ज्यादा न लगे, लेकिन हर इंजन Mk1A की उड़ान परीक्षण और ऑपरेशनल तैनाती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इंजन सप्लाई की अहमियत

F404 इंजन तेजस Mk1A को शक्ति प्रदान करता है। समय पर इंजन न मिलने से विमान तैयार होने में देरी होती थी, जिससे HAL की उत्पादन श्रृंखला पर असर पड़ रहा था। छठा इंजन मिलने से HAL अब पहले से बने एयरफ्रेम में इसे लगाकर नए विमान तैयार कर सकता है। इससे उत्पादन की गति बढ़ेगी और वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत बनाए रखने में मदद मिलेगी।

उत्पादन और लक्ष्य

हालांकि HAL की वर्तमान क्षमता प्रति माह एक या दो विमान बनाने की है, इंजन की सप्लाई में स्थिरता आने से Mk1A प्रोजेक्ट को नई रफ्तार मिली है। अगर 2026 में GE लगातार इंजन सप्लाई करता रहा, तो इस साल एयरफोर्स को पांच नए विमान देने का लक्ष्य आसानी से पूरा हो सकेगा।

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