बांस की खेती के फायदे
बांस एक टिकाऊ और कम लागत वाली फसल है। इसके लिए अधिक पानी या विशेष देखभाल की आवश्यकता नहीं होती। एक बार बांस लग जाने के बाद यह कई वर्षों तक लगातार उत्पादन देता है। इसके उत्पाद का उपयोग फर्नीचर, कागज, निर्माण कार्य, हस्तशिल्प और सजावटी सामान बनाने में होता है।
सब्सिडी की प्रक्रिया
किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर जाकर राष्ट्रीय बांस मिशन लिंक में आवेदन फॉर्म भरना होगा। आवेदन के साथ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन की जांच जिले स्तर पर होगी और पात्र किसानों के बैंक खाते में सब्सिडी सीधे भेज दी जाएगी।
पात्रता शर्तें:
किसान के नाम पर जमीन होना जरूरी। घनी बांस की खेती के लिए कम से कम 0.04 हेक्टेयर जमीन और अधिकतम 0.20 हेक्टेयर तक ही सब्सिडी मिलेगी। खेत की मेड़ पर खेती करने वाले कम से कम 10 पौधे लगाएं। पति-पत्नी दोनों अलग-अलग जमीन पर आवेदन कर सकते हैं।
लागत और सब्सिडी
बांस की खेती में 1 हेक्टेयर पर लगभग 1.20 लाख रुपये खर्च आते हैं। सरकार इस लागत का आधा, यानी करीब 60,000 रुपये, सीधे किसान के खाते में देती है। इससे शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है और किसान आसानी से बांस की खेती शुरू कर सकते हैं।
योजना का क्षेत्र
यह योजना बिहार के 27 जिलों में लागू है, जिनमें अररिया, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, दरभंगा, चंपारण, गोपालगंज, जमुई, कटिहार, मधेपुरा, मधुबनी, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल और वैशाली शामिल हैं।
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