ब्रह्मोस से आगे क्यों मानी जा रही है LRAShM
जानकारी के अनुसार LRAShM की रफ्तार अधिक होगी और इसकी मारक दूरी भी ज्यादा होगी। इसका सीधा मतलब यह है कि दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम मिलेगा। आधुनिक युद्ध में यही सबसे बड़ा फर्क पैदा करता है, जो हथियार जितना तेज और दूर तक मार करने वाला होता है, वह उतना ही घातक माना जाता है।
सिर्फ नौसेना तक सीमित नहीं रहेगा प्रोजेक्ट
शुरुआत में यह मिसाइल नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। भारतीय सेना ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई है और इसके जमीन पर हमला करने वाले संस्करण पर भी काम चल रहा है। लक्ष्य साफ है, एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना, जिससे समुद्र और जमीन दोनों पर सटीक हमला किया जा सके।
दुश्मन की सुरक्षा दीवार को भेदने की क्षमता
लंबी दूरी और तेज गति की वजह से LRAShM दुश्मन की एयर डिफेंस और मिसाइल डिफेंस प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बनेगी। समुद्री क्षेत्र में यह दुश्मन के युद्धपोतों और तटीय ठिकानों को सुरक्षित दूरी से निशाना बना सकेगी। यही वजह है कि इसे भविष्य के युद्धों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
कई रूपों में आएगी ये घातक नई मिसाइल
DRDO इस प्रोजेक्ट को एक “मिसाइल परिवार” के तौर पर विकसित कर रहा है। जिसका पहला चरण: एंटी-शिप वर्जन, दूसरा चरण: लैंड-अटैक वर्जन और भविष्य की योजना: एयर-लॉन्च वर्जन की हैं। हालांकि फाइटर जेट से इतनी तेज मिसाइल दागना तकनीकी रूप से ज्यादा जटिल होता है, इसलिए फिलहाल जमीन और समुद्र से लॉन्च होने वाले संस्करण पर फोकस है।

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