सीएम नीतीश की बड़ी घोषणा: युवाओं के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार में उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक अहम और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य सरकार ने 55 शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का निर्णय किया है। यह योजना दो चरणों में लागू की जाएगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधन और अकादमिक माहौल को बेहतर बनाया जा सकेगा।

आपको बता दें की मुख्यमंत्री ने यह घोषणा बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से की। उन्होंने बताया कि यह फैसला सात निश्चय-3 के अंतर्गत चौथे निश्चय ‘उन्नत शिक्षा–उज्ज्वल भविष्य’ को साकार करने की दिशा में लिया गया है।

दो चरणों में होगा विकास

सरकार की योजना के अनुसार, पहले चरण में वर्ष 2026-27 के लिए 31 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों का चयन किया गया है। इसके बाद दूसरे चरण में 2027 से 2030 के बीच 24 अन्य संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संसाधनों से लैस किया जाएगा।

हर प्रखंड में डिग्री कॉलेज का लक्ष्य

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य के सभी प्रखंडों में उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। वर्तमान में बिहार के 534 प्रखंडों में से 213 प्रखंड ऐसे हैं, जहां कोई भी अंगीभूत या संबद्ध डिग्री कॉलेज मौजूद नहीं है। सरकार ने निर्णय लिया है कि इन सभी 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे और जुलाई 2026 से इनमें पढ़ाई भी शुरू कर दी जाएगी। इस पहल से खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों और छात्राओं, विशेष रूप से लड़कियों को, अपने ही क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

पुराने प्रतिष्ठित संस्थानों का होगा उन्नयन

सरकार ने यह भी तय किया है कि राज्य के पुराने और प्रतिष्ठित कॉलेजों को योजनाबद्ध तरीके से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए उन संस्थानों के अनुभवी शिक्षकों, वर्तमान छात्रों और पूर्व छात्रों से सुझाव लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि सुधार जमीनी जरूरतों के अनुरूप हो।

सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को राज्य से बाहर जाने की मजबूरी कम होगी।

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