1 .कुलथी की दाल: आयुर्वेद में कुलथी की दाल को पथरी के लिए उपयोगी माना गया है। इसका पानी शरीर में जमा मिनरल्स को तोड़ने में सहायक हो सकता है। माना जाता है कि नियमित रूप से इसका सेवन करने से छोटी पथरी में राहत मिल सकती है।
2 .नींबू पानी: नींबू में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व यूरिन में साइट्रेट की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे कैल्शियम स्टोन बनने की संभावना कम हो सकती है। गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर दिन में एक-दो बार पीना फायदेमंद माना जाता है।
3 .सेब का सिरका: सेब के सिरके को पानी में मिलाकर पीने से पथरी के कारण होने वाले दर्द में कुछ लोगों को राहत मिलती है। यह पाचन सुधारने और शरीर के पीएच स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकता है।
4 .पत्थरचट्टा का पौधा: पत्थरचट्टा को आयुर्वेद में किडनी से जुड़ी समस्याओं के लिए जाना जाता है। इसकी पत्तियों का रस पारंपरिक रूप से पथरी में उपयोग किया जाता रहा है और इसे मूत्र प्रवाह को बेहतर बनाने वाला माना जाता है।
5 .तुलसी का रस: तुलसी में मौजूद औषधीय गुण सूजन और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। शहद के साथ तुलसी का रस लेने से कुछ मामलों में पथरी से होने वाली तकलीफ में राहत महसूस होती है।
जरूरी सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि ये उपाय केवल शुरुआती या हल्के मामलों में सहायक हो सकते हैं। यदि पथरी का आकार बड़ा हो, तेज दर्द, खून आना, बुखार या पेशाब में रुकावट जैसी समस्या हो, तो केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर या यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।

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