भारत की नई उड़ान: माइक्रो जेट इंजन विकसित करने की तैयारी

नई दिल्ली। भारत का एयरोस्पेस सेक्टर एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। जहां पहले छोटे जेट इंजनों को सीमित उपयोग की तकनीक माना जाता था, अब वही माइक्रो टर्बो और टर्बोजेट इंजन देश की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल हो चुके हैं। रक्षा से लेकर रिसर्च और सिविल उपयोग तक, इन इंजनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

अब तक भारत को छोटे जेट इंजनों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन बदलते वैश्विक हालात और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। देश की निजी कंपनियां और स्टार्ट-अप अब स्वदेशी माइक्रो जेट इंजन डिजाइन, टेस्ट और निर्माण की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं।

छोटे इंजन, बड़ी भूमिका

माइक्रो जेट इंजनों की ताकत कुछ सौ न्यूटन से लेकर कई किलो न्यूटन तक होती है। आकार में छोटे होने के बावजूद ये इंजन हाई-स्पीड मानव रहित प्लेटफॉर्म्स के लिए बेहद अहम हैं। क्रूज मिसाइल, जेट-पावर्ड ड्रोन, लोइटरिंग हथियार और डिकॉय सिस्टम इन्हीं इंजनों की मदद से लंबी दूरी और अधिक गति हासिल कर पाते हैं। एयर डिफेंस अभ्यास में इस्तेमाल होने वाले टारगेट ड्रोन भी इन्हीं इंजनों पर आधारित होते हैं। जैसे-जैसे आधुनिक युद्ध प्रणाली ऑटोनॉमस और तेज़ होती जा रही है, वैसे-वैसे इन माइक्रो इंजनों पर नियंत्रण और तकनीकी पकड़ और भी जरूरी बनती जा रही है।

सिविल सेक्टर में खुल रहे नए रास्ते

माइक्रो जेट इंजन केवल सैन्य उपयोग तक सीमित नहीं हैं। सिविल सेक्टर में भी इनके प्रयोग की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाई-स्पीड रिसर्च ड्रोन, आपातकालीन लॉजिस्टिक्स, सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज़ डिलीवरी और प्रयोगात्मक एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स में इन इंजनों को अपनाया जा रहा है। नई मटीरियल टेक्नोलॉजी और कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों ने इन इंजनों को अब केवल प्रयोगशाला की चीज़ नहीं रहने दिया है। 3D प्रिंटिंग जैसे तरीकों ने विकास प्रक्रिया को तेज और लचीला बना दिया है।

प्राइवेट कंपनियों की मजबूत मौजूदगी

इस क्षेत्र में कई भारतीय निजी कंपनियां और स्टार्ट-अप सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। भारत फोर्ज छोटे टर्बोजेट इंजनों पर काम कर रही है, जबकि Veda Aeronautics और DG Propulsion हल्के और मल्टी-फ्यूल माइक्रो इंजन विकसित करने पर ध्यान दे रहे हैं। Raghu Vamsi, EDITH Defence Systems और Godrej & Boyce जैसी कंपनियां भी माइक्रो जेट इंजन इकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं।

इंजन परिवार तैयार करने की दिशा में कदम

भारतीय कंपनियां केवल एक-दो मॉडल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे इंजन परिवार विकसित किए जा रहे हैं। छोटे ड्रोन के लिए 200 न्यूटन क्लास इंजन से लेकर क्रूज मिसाइल आकार के प्लेटफॉर्म्स के लिए अधिक शक्तिशाली जेट इंजन तैयार किए जा रहे हैं। इसका सीधा लाभ भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को मिलेगा। स्वदेशी माइक्रो जेट इंजन आयात पर निर्भरता कम करेंगे, प्रतिबंधों और सप्लाई चेन जोखिम से सुरक्षा देंगे और भारतीय ड्रोन व मिसाइल सिस्टम को पूरी तरह देसी डिजाइन के अनुरूप बनाने में मदद करेंगे।

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