प्लस-टू स्कूलों में शुरू होगी पढ़ाई
नए कॉलेजों के भवन निर्माण तक स्नातक पाठ्यक्रम संबंधित प्रखंडों के प्लस-टू स्कूलों में संचालित किए जाएंगे। इसके लिए अलग समय-सारणी के तहत कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। छात्रों को पढ़ाने हेतु प्राध्यापकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी, जबकि कॉलेजों की मान्यता संबंधित विश्वविद्यालयों से ली जाएगी।
उद्देश्य और योजना
यह पहल मुख्यमंत्री के सात निश्चय-तीन के चौथे निश्चय – उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य के तहत लाई जा रही है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा प्रदान करना है। फिलहाल राज्य के 534 प्रखंडों में से 213 प्रखंडों में कोई भी अंगीभूत या संबद्ध डिग्री कॉलेज नहीं है।
कॉलेजों का संपूर्ण ढांचा
हर नए डिग्री कॉलेज में विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय की पढ़ाई होगी। इसके साथ ही चुनिंदा वोकेशनल कोर्स के लिए अलग विभाग स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक विभाग में एक प्रोफेसर और दो सहायक प्रोफेसर की तैनाती की जाएगी, ताकि व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो।
बजट और वित्तीय प्रावधान
नए कॉलेजों की स्थापना के लिए उच्च शिक्षा विभाग के बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य के 55 उच्च शिक्षण संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में परिवर्तित करने के लिए भी विशेष धनराशि सुनिश्चित की गई है। अनुमान है कि इस पूरे कार्यक्रम पर लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
भूमि चयन और निर्माण कार्य
सभी प्रखंडों में कॉलेजों के लिए भूमि का चयन तेजी से हो रहा है और कई स्थानों पर भूमि चिन्हित कर दी गई है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने इस पहल की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। इस योजना से न केवल छात्रों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे, बल्कि व्यावसायिक और अकादमिक दोनों क्षेत्रों में बिहार की शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

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