7500 गोशालाएं बनेंगी हरा चारा उत्पादन केंद्र
प्रदेश में मौजूद करीब 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्रों को हरा चारा उत्पादन का मजबूत हब बनाने की योजना है। इससे गोशालाओं में रहने वाले पशुओं को नियमित और पौष्टिक आहार मिलेगा, वहीं स्थानीय किसानों को चारा उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिलेगा। इस पहल से ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
‘मिशन फाडर’ से बनेगा किसानों का नेटवर्क
गो सेवा आयोग द्वारा ‘मिशन फाडर’ नाम से प्रदेशव्यापी अभियान शुरू किया जा रहा है। इस मिशन के तहत हर गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य चारा उत्पादन, उसकी खरीद-बिक्री और उचित मूल्य तय करने की एक व्यवस्थित व्यवस्था बनाना है। इससे किसानों को बाजार की अनिश्चितता से राहत मिलेगी और गोशालाओं को लगातार चारे की उपलब्धता बनी रहेगी।
गोशालाओं की भूमि का होगा बेहतर उपयोग
सरकार गोशालाओं में उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करने की योजना पर काम कर रही है। यहां मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास जैसी पौष्टिक और तेजी से बढ़ने वाली फसलों का रोपण किया जाएगा। ये चारे न केवल पोषण से भरपूर होते हैं, बल्कि कम लागत में अधिक उत्पादन भी देते हैं।
विविध चारा फसलों को भी मिलेगा बढ़ावा
इसके अलावा गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा और बरसीम की खेती को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे चारे की विविधता बनी रहेगी और अलग-अलग मौसम में गोवंश को संतुलित आहार मिल सकेगा।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ
इस पहल से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे, क्योंकि उन्हें चारा उत्पादन के लिए एक स्थायी बाजार मिलेगा। साथ ही गोशालाओं का संचालन भी अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ हो सकेगा। लंबे समय में यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती, गोवंश संरक्षण और किसानों की आय वृद्धि—तीनों लक्ष्यों को एक साथ साधने का काम करेगी।
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