फर्जी दस्तावेजों के सहारे मिली नौकरी
जांच में सामने आया है कि कई शिक्षकों ने फर्जी बीएड, बीए, बीएससी की डिग्री के साथ-साथ गलत निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की थी। इन शिक्षकों को वर्षों तक नियमित रूप से वेतन मिलता रहा, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
1400 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन लगभग 3 हजार फर्जी शिक्षकों को पिछले वर्षों में करीब 1400 करोड़ रुपये का वेतन दिया गया है। अब सरकार इस पूरी राशि को ब्याज सहित वसूलने की तैयारी में है। पहले चरण में इन्हीं 3 हजार शिक्षकों पर कार्रवाई शुरू की जा रही है।
12 हजार शिक्षक जांच के घेरे में
मामला यहीं खत्म नहीं होता। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, करीब 12 हजार शिक्षक अभी भी संदेह के दायरे में हैं। इन सभी के प्रमाण पत्रों की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई होगी। जांच के दायरे में आने वाले शिक्षकों में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली और हरियाणा से जुड़े प्रमाण पत्र भी शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का बयान
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि पंचायत स्तर पर राज्य के 38 जिलों में करीब 3.68 लाख नियोजित शिक्षकों की बहाली हुई थी। इन सभी के दस्तावेजों की जांच कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी गई है। राज्य में कुल शिक्षकों की संख्या लगभग 5.80 लाख है।
मंत्री ने साफ कहा कि शिक्षा विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ प्रमाण पत्रों की जांच कर रहा है और जिन शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें नौकरी से बर्खास्तगी के साथ-साथ आर्थिक वसूली भी शामिल होगी।

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