ताकाइची खुले तौर पर चीन विरोधी रुख रखने वाली, हिंद-प्रशांत रणनीति की समर्थक और भारत को भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानने वाली नेता हैं। उनकी इस जीत का मतलब साफ है: टोक्यो अब बीजिंग के दबाव में नहीं झुकने वाला। भारत के लिए यह जीत रणनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण लाभ लेकर आई है।
एलडीपी की ऐतिहासिक सफलता
जापानी मीडिया के अनुसार, रविवार को हुए आम चुनाव में ताकाइची के नेतृत्व में एलडीपी गठबंधन ने निचले सदन में 465 में से 316 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया। बहुमत पाने के लिए जरूरी आंकड़ा 261 सीटें हैं। यह एलडीपी की अब तक की सबसे बड़ी जीत है और इसने 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोन द्वारा स्थापित 300 सीटों के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ताकाइची को उनके नेतृत्व में हुई ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई दी। मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत-जापान की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि ताकाइची के नेतृत्व में दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे।
जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री
सनाए ताकाइची अक्टूबर 2025 में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने सत्ता संभालते ही आर्थिक सुधार, सैन्य क्षमता वृद्धि और अमेरिका के साथ गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया। ताकाइची के रूढ़िवादी और सख्त नेतृत्व के अंदाज ने उन्हें युवाओं में लोकप्रिय बना दिया है।
ताकाइची की जीत केवल जापान के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया के भू-राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।चीन की आक्रामक नीतियों चाहे वह LAC की सीमा विवाद हो, ताइवान का मामला हो या साउथ चाइना सी के खिलाफ अब भारत को जापान के रूप में एक और मजबूत सहयोगी मिला है। इससे क्वाड (QUAD) को नई गति मिलेगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की घेराबंदी और सख्त होगी।
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