दरअसल, रूस इस समय दशकों के सबसे गंभीर लेबर संकट से गुजर रहा है। यूक्रेन युद्ध, जनसंख्या गिरावट और यूरोपीय प्रतिबंधों की वजह से रूस में कामगारों की भारी कमी हो गई है। पहले रूस इस कमी को मध्य एशियाई देशों से पूरा करता था, लेकिन अब उसकी नजर भारत पर टिक गई है।
रूस में बढ़ेगा भारतीयों का दबदबा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मॉस्को और अन्य बड़े रूसी शहरों में अब भारतीय कामगारों की मौजूदगी तेजी से बढ़ने वाली है। सड़कों से बर्फ हटाने जैसे नगर निगम के काम हों या बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, रेस्टोरेंट इंडस्ट्री हो या वेल्डिंग और टेक्निकल सेक्टर। हर जगह भारतीयों की जरूरत महसूस की जा रही है।
दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान हुए द्विपक्षीय समझौतों ने इस रास्ते को और साफ कर दिया। इन समझौतों के तहत रूस हजारों भारतीय नागरिकों को वर्क परमिट देने की तैयारी में है। खास बात यह है कि पिछले साल रूस ने भारतीयों को जितने वर्क परमिट दिए, उसने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और अब यह संख्या कई गुना बढ़ाई जा सकती है।
अमेरिका की चिंता और ट्रंप फैक्टर
अमेरिका लंबे समय से भारत को रूस से दूर करने की कोशिश करता रहा है। लेकिन यह ताजा घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि मॉस्को भारत को केवल रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि भरोसेमंद मानव संसाधन सहयोगी भी मान रहा है।

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