आपको बता दें की केंद्रीय करों में यह बढ़ोतरी वित्त आयोग की अनुशंसाओं और केंद्र द्वारा कर वसूली में लगातार सुधार का परिणाम है। केंद्रीय करों में वृद्धि से राज्यों को मिलने वाला पैसा साल दर साल बढ़ रहा है, और बिहार इस वृद्धि का सीधा लाभ उठाएगा।
पिछले वर्षों की हिस्सेदारी का रुझान
बिहार की केंद्रीय कर हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ती रही है:
2021–22: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 91,353
2022–23: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 95,510
2023–24: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 1,13,604
2024–25: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 1,29,435
2025–26: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 1,38,516
2026–27: केंद्रीय करों में हिस्सा (करोड़ रुपये) 1,51,832
इस तालिका से स्पष्ट है कि बिहार की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और यह राज्य के विकास कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त वित्तीय बल देगा।
केंद्रीय अनुदान और वसूली
चालू वित्तीय वर्ष (2025–26) में केंद्र से बिहार को 54,575 करोड़ रुपये का अनुमानित अनुदान भी मिलने वाला है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दो प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, वर्ष 2025 के अंत तक राज्य को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में 64,448.32 करोड़ रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
उप-कर और अधिभार पर राज्य की मांग
बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ प्री-बजट बैठक में उप-करों (सेस) और अधिभारों (सरचार्ज) में भी राज्यों की हिस्सेदारी की मांग की थी। उनका तर्क था कि इन हिस्सों को अब विभाज्य कोष में शामिल करना चाहिए, क्योंकि इनकी हिस्सेदारी 2011–12 के 10.4 प्रतिशत से बढ़कर वर्तमान में 13.6 प्रतिशत हो चुकी है। हालांकि, इस बजट में उप-कर और अधिभार अभी भी विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं बने।
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