भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील, रूस की बढ़ी टेंशन?

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। इस समझौते की सबसे चर्चित शर्त यह है कि भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद धीरे-धीरे बंद करनी होगी। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव एक झटके में संभव नहीं है और ऐसा करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने साफ किया है कि भारत फिलहाल रूस से तेल आयात पूरी तरह रोकने की स्थिति में नहीं है। मूडीज के अनुसार, यदि भारत अचानक रूसी तेल से दूरी बनाता है तो इसका सीधा असर आर्थिक विकास और महंगाई पर पड़ेगा।

रूस से तेल पर निर्भरता कम, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं

मूडीज का कहना है कि भारत ने बीते कुछ महीनों में रूस से तेल की खरीद में कटौती जरूर की है, लेकिन पूरी तरह से विकल्प ढूंढ पाना आसान नहीं है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है और इतनी बड़ी मांग को तुरंत गैर-रूसी स्रोतों से पूरा करना वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा सकता है।

ट्रेड डील से निर्यात को मिलेगा नया सहारा

ऊर्जा आयात को लेकर सतर्क रुख के बावजूद, मूडीज ने इस ट्रेड डील को भारत के लिए कई मायनों में फायदेमंद बताया है। खासतौर पर अमेरिकी टैरिफ में कटौती से भारतीय निर्यात को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अमेरिका पहले से ही भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। वर्ष 2025 के शुरुआती 11 महीनों में भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा अमेरिका को गया। टैरिफ घटने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में और प्रतिस्पर्धी बनेंगे, जिससे निर्यात में नई जान आने की संभावना है।

अमेरिका से क्या-क्या खरीदेगा भारत?

समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से कई अहम क्षेत्रों में खरीद बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसमें पेट्रोलियम उत्पादों के अलावा रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां, दूरसंचार उपकरण और विमान शामिल हैं। इससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंध और गहरे होने की उम्मीद है।

ट्रंप का बड़ा ऐलान और सख्त शर्तें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ट्रेड डील की घोषणा करते हुए कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। इसके बदले भारत को रूसी तेल की खरीद बंद करने और व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करने पर सहमत होना होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत ने “BUY AMERICAN” नीति को बड़े स्तर पर अपनाने का भरोसा दिया है, जिससे अमेरिकी उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा।

भारत के लिए संतुलन की चुनौती

यह ट्रेड डील भारत के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आई है। एक ओर निर्यात और निवेश के नए रास्ते खुल रहे हैं, तो दूसरी ओर ऊर्जा सुरक्षा और रूस के साथ संबंधों को लेकर संतुलन साधना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में भारत की रणनीति यह तय करेगी कि वह इस डील से कितना लाभ उठा पाता है और वैश्विक दबावों को कैसे संभालता है।

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